गंगा को जमीन पर लाने वाले अजर-अमर महर्षि भगीरथजी स्वर्ग में लंबी साधना के बाद जब चैतन्य हुए, तो उन्होने पाया कि भारतभूमि पर पब्लिक पानी की समस्या से त्रस्त है। समूचा भारत पानी के झंझट से ग्रस्त है। सो महर्षि ने दोबारा गंगा द्वितीय को लाने की सोची। महर्षि भारत भूमि पर पधारे और मुनि की रेती, हरिद्वार पर दोबारा साधनारत हो गये।

मुनि की रेती पर एक मुनि को भगीरथ को साधना करते देख पब्लिक में जिज्ञासा भाव जाग्रत हुआ।

छुटभैये नेता बोले कि गुरु हो न हो, जमीन पक्की कर रहा है। ये अगला चुनाव यहीं से लड़ेगा। यहां से एक और कैंडीडेट और बढ़ेगा। बवाल होगा, पुराने नेताओं की नेतागिरी पर सवाल होगा।

पुलिस वालों की भगीरथ साधना कुछ यूं लगी-हो न हो, यह कोई चालू महंत है। जरुर साधना के लपेटे में मुनि की रेती को लपेटने का इच्छुक संत है। तपस्या की आड़ में कब्जा करना चाहता है।

खबरिया टीवी चैनलों को लगा है कि सिर्फ मुनि हैं, तो अभी फोटोजेनिक खबरें नहीं बनेंगी। फोटोजेनिक खबरें तब बनेंगी, जब मुनि की तपस्या तुड़वाने के लिए कोई फोटोजेनिक अप्सरा आयेगी। टीआरपी साधना में नहीं, अप्सराओं में निहित होती है। टीवी पर खबर को फोटूजेनिक होना मांगता।

नगरपालिका वालों ने एक दिन जाकर कहा-मुनिवर साधना करने की परमीशन ली है आपने क्या।

भगीरथ ने कहा-साधना के लिए परमीशन कैसी।

नगरपालिका वालों ने कहा-महाराज परमीशन का यही हिसाब-किताब है। आप जो कुछ करेंगे, उसके लिए परमीशन की जरुरत होगी। थोड़े दिनों में आप पापुलर हो जायेंगे, एमपी, एमएलए वगैरह बन जायेंगे, तो फिर आप परमीशन देने वालों की कैटेगरी में आयेंगे।

भगीरथ ने कहा-मैं साधना तो जनसेवा के लिए कर रहा हूं। सांसद मंत्री थोड़े ही होना है मुझे।

जी सब शुरु में यही कहते हैं। आप भी यही कहते जाइए। पर जो हमारा हिसाब बनता है, सो हमें सरकाइये-नगरपालिका के बंदों ने साफ किया।

देखिये मैं साधु-संत आदमी हूं, मेरे पास कहां कुछ है-भगीरथ ने कहा।

महाराज अब सबसे ज्यादा जमीन और संपत्ति साधुओं के पास ही है। न आश्रम, न जमीन, न कार, न नृत्य की अठखेलियां, ना चेलियां-आप सच्ची के साधु हैं या फोकटी के गृहस्थ। हे मुनिवर, आजकल साधुओं के पास ही टाप टनाटन आइटम होते हैं। दुःख, चिंता ,विपन्नता तो अब गृहस्थों के खाते के आइटम हैं-नगरपालिका वालों ने समझाया।

भगीरथ यह सुनकर गुस्सा हो गये और हरिद्वार-ऋषिकेश से और ऊपर के पहाड़ों पर चल दिये।

भगीरथ को बहुत गति से पहाड़ों की तरफ भागता हुआ सा देख कतिपय फोटोग्राफर भगीरथ के पास आकर बोले –देखिये, हम आपको जूते, च्यवनप्राश, अचार कोल्ड ड्रिंक, चाय, काफी, जूते, चप्पल जैसे किसी प्राडक्ट की माडलिंग के लिए ले सकते हैं।

पर माडलिंग क्या होती है वत्स-भगीरथ ने पूछा।

हा, हा, हा, हा हर समझदार और बड़ा आदमी इंडिया में माडलिंग के बारे में जानता है। आप नहीं जानते, तो इसका मतलब यह हुआ कि या तो आप समझदार आदमी नहीं हैं, या बडे़ आदमी नहीं हैं। एक बहुत बड़े सुपर स्टार को लगभग बुढ़ापे के आसपास पता चला कि उसकी धांसू परफारमेंस का राज नवरत्न तेल में छिपा है। एक बहुत बड़े प्लेयर को समझ में आया कि उसकी बैटिंग की वजह किसी कोल्ड ड्रिंक में घुली हुई है। आप की तेज चाल का राज हम किसी जूते या अचार को बना सकते हैं, बोलिये डील करें-फोटोग्राफरों ने कहा।

देखिये मैं जनसेवा के लिए साधना करने जा रहा हूं-भगीरथ ने गुस्से में कहा।

गुरु आपका खेल बड़ा लगता है। बड़े खेल करने वाले सारी यह भाषा बोलते हैं। चलिये थोड़ी बड़ी रकम दिलवा देंगे-एक फोटोग्राफर ने कुछ खुसफुसायमान होकर कहा।

जल संकट से द्रवित होकर जनता को परेशानी से निजात दिलाने के लिए गंगा द्वितीय को पृथ्वी पर लाने का उपक्रम करने लगे। इसके लिए वह हरिद्वार के पास मुनि की रेती पर साधनारत हुए तो नगरपालिका वालों ने, नेताओं ने और दूसरे तत्वों ने उन्हे परेशान किया। वह परेशान होकर ऊपर पहाड़ों पर जाने लगे, तो कई फोटोग्राफरों ने उनके सामने तरह-तरह के आइटमों के माडलिंग के प्रस्ताव रखे। फोटोग्राफरों ने उनसे कहा कि इस तरह की जनसेवा के पीछे उनका जरुर बड़ा खेल है और इस खेल के साथ वे चार पैसे एक्स्ट्रा भी कमा लें, तो हर्ज नहीं है।अब आगे पढ़िये समापन किस्त में।)

देखिये, ये क्या खेल-खेल लगा रखा है। क्यां यहां बिना खेल के कुछ नहीं होता क्या-भगीरथ बहुत गुस्से में बोले।

जी बगैर खेल के यहां कुछ नहीं होता। यहां गंगा इसलिए बहती है कि वह गंगा साबुन के लिए माडलिंग कर सके। गोआ में समुद्र इसलिए बहता है कि वह गोआ टूरिज्म के इश्तिहारों में काम आ सके। हिमालय के तमाम पहाड़ इसलिए सुंदर हैं कि उन्होने उत्तरांचल टूरिज्म, उत्तर प्रदेश टूरिज्म के इश्तिहारों में माडलिंग करनी है। आपकी चाल में फुरती इसलिए ही है कि वह किसी चाय वाले या च्यवनप्राश वाले के इश्तिहार में काम आ सके। आपके बाल अभी तक काले इसलिए हैं कि वे नवरत्न तेल के इश्तिहार के काम आ सकें। हे मुनि, डाल से चूके बंदर और माडलिंग के माल से चूके बंदों के पास सिवाय पछतावे के कुछ नहीं होता-एक समझदार से फोटोग्राफर ने उन्हे समझाया।

भगीरथ मुनि गु्स्से में और ऊंचे पहाड़ों की ओर चले गये।

कई बरसों तक साधना चली।

मां गंगा द्वितीय प्रसन्न हुईं और एक पहाड़ को फोड़कर भगीरथ के सामने प्रकट हुईं।

जिस पहाड़ को फोड़कर गंगा प्रकट हुई थीं, वहां का सीन बदल गया था। बहुत सुंदर नदी के रुप में बहने की तैयारी गंगा मां कर ही रही थीं कि वहां करीब के एक फार्महाऊस वाले के निगाह पूरे मामले पर पड़ गयी।

वह फार्महाऊस पानी बेचने वाली एक कंपनी का था।

गंगा द्वितीय जिस कंपनी के फार्महाऊस के पास से निकल रही हैं, उसी कंपनी का हक गंगा पर बनता है, ऐसा विचार करके उस कंपनी का बंदा भगीरथ के पास आया और बोला कि गंगा पर उसकी कंपनी की मोनोपोली होगी। वही कंपनी गंगा का पानी बेचेगी।

तब तक बाकी पानी कंपनियों को खबर हो चुकी थी।

बिसलेरी, खेंचलेरी, खालेरी, पालेरी, पचालेरी, फिनफिन, शिनशिन,छीनछीन समेत सारी अगड़म-बगड़म कंपनियों के बंदे मौके पर पहुंच लिये।

हर कंपनी वाला भगीरथ को समझा रहा था कि वह उसी की कंपनी को ज्वाइन कर ले। मुंहमांगी रकम दी जायेगी। गंगा द्वितीय उस कंपनी की संपत्ति हो जायेगी और भगीरथ को रायल्टी दे दी जायेगी।

पर भगीरथ नहीं माने। वह गंगा द्वितीय को जनता को समर्पित करना चाहते थे।

किसी कंपनी वाले की दाल नहीं गली।

पर……….।

सारी कंपनियों के बंदों ने आपस में खुसुर-पुसर की। खुसर-पुसर का दायरा बढ़ा, नगरपालिकाओं वाले आ गये। माहौल और खुसरपुसरित हुआ-भगीरथी की फ्यूचर पापुलरिटी की सोचकर आतंकित-परेशान नेता भी आ लिये। वाटर रिस्टोरेशन के लिए काम कर रहे एनजीओ के बंदे भी इस खुसर-पुसर में शामिल हुए।

फिर ………..भगीरथ गिरफ्तार कर लिये गये।

उन पर निम्नलिखित आरोप लगाये गये-

1- शासन की अनुमति लिये बगैर भगीरथ ने साधना की। इससे कानून –व्यवस्था जितनी भी थी, उसे खतरा हो सकता था।

2- इस इलाके को पहले सूखा क्षेत्र माना गया था। अब यहां पानी आने से कैलकुलेशन गड़बड़ा गये। पहले इसे सूखा क्षेत्र मानते हुए यहां तर किस्म की ग्रांट-सब्सिडी की व्यवस्था की गयी थी योजना में। अब दरअसल पूरी योजना ही गड़बड़ा गयी। यह सिर्फ भगीरथ की वजह से हुआ। योजना प्रक्रिया को संकट में डालने का अपराध देशद्रोह के अपराध से कम नहीं है। <!–[endif]–>

<!–[if !supportLists]–>3- भगीरथ ने विदेशों से आ रही मदद, रकम में बाधा पैदा करके राष्ट्र को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा से वंचित किया है। इस क्षेत्र के जल संकट को निपटाने के लिए फ्रांस के एनजीओ फाऊं-फाऊं फाउंडेशन और कनाडा के एनजीओ खाऊं-खाऊं ट्रस्ट ने लोकल एनजीओज (संयोगवश जिनकी संचालिकाएं स्थानीय ब्यूरोक्रेट्स की पत्नियां थीं) को कई अरब डालर देने का प्रस्ताव दिया था। अब जल आ गया, तो इन एनजीओज को संकट हो गया। फ्रांस और कनाडा के एनजीओज ने सहायता कैंसल कर दी। इस तरह से भगीरथ ने गंगा द्वितीय को बहाकर विदेशी मदद को अवरुद्ध कर दिया। भारत को विदेशी मुद्रा से वंचित करना देशद्रोह के अपराध से कम नहीं है। <!–[endif]–>

<!–[if !supportLists]–>4- पहाड़ को फोड़कर गंगा द्वितीय जिस तरह से प्रकट हुई हैं, उससे इस क्षेत्र का नक्शा बदल गया है, जो हरिद्वार नगर पालिका या किसी और नगर पालिका ने पास नहीं किया है। <!–[endif]–>

<!–[if !supportLists]–>5- शासन की सम्यक संस्तुति के बगैर जिस तरह से नदी निकली है, वह हो न हो, किसी दुश्मन की साजिश भी हो सकती है। <!–[endif]–>

गिरफ्तार भगीरथ जेल में चले गये, उनको केस लड़ने के लिए कोई वकील नहीं मिला, क्योंकि सारे वकील पानी कंपनियों ने सैट कर लिये थे।

लेटेस्ट खबर यह है कि गंगा निकालना तो दूर अब भगीरथ खुद को जेल से निकालने का जुगाड़ नहीं खोज पा रहे हैं।

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जंगल मे महाराज के आकस्मिक निधन हो जाने पर करकट दमनक ने महारानी तो तख्त का वारिस घोषित कर अपनी तिकडी को फ़िट करने की बहुत कोशिश की ,पर महारानी ने एक बैल को चुना जो जुगाली करने के अलावा सिर्फ़ सिर हिलाता रहता था,लेकिन फ़िर भी महारानी को करकट दमनक और पिंगलक की सहायता तो लेनी ही पडी.

काफ़ी वक्त गुजर गया, महारानी भी जंगल की राजनीती मे अपनी समझ दिखाने लगी थी ,महारानी ने जैसे ही जंगल मे चुनाव कराने की इच्छा जाहिर की,दमनक ने तडाक से जंगल के कर्मचारियो के वेतन बढाने की घोषणा महारानी से करवा दी.

करकट दमनक और पिंगलक पुराने खिलाडी थे,उन्होने तुरंत भाप लिया महारानी अब सीधे सीधे  खुद या फ़िर राजकुमार के नाम पर शासन संभालना चाहती है

पिंगल नाम का सुअर जो हमेशा उस जगह अपनी थूथन गडाये फ़िरता था जहा माल मिलने की कोई संभावना हो,महाराज के खजाने की देख रेख के नाम पर हरएक से कुछ ना कुछ निकलवाने मे उस्ताद था ,उसी ने ने महाराज के  चुनाव आदेश के नाम पर मोटा माल वसूल कर आधा अपने घर भेजा आधा महाराज के पास जमा करा दिया था

जंगल मे व्यापारियो ने पिंगल को दिये पैसे तुरंत पूरे करने के लिये माल की कमी दिखा कर रेट दुगने चौगुने वसूल करने शुरू कर दिये.

जनता त्राही त्राही करने लगी ,बात महारानी तक पहुची,महारानी ने मिटिंग बुलाई ,दमनक ने महारानी को पक्का यकीन दिला दिया की महंगाई कही नही बढी है केवल जंगल मे ये कुछ विरोधी पार्टी के  लाला लोग माल दबाकर मोटा माल कमाने की फ़िराक मे है अगर आपकी आज्ञा हो तो सेनापती को बुला कर माल जब्त करा देते है,जनता को भी लगेगा कि हमने कुछ किया और विरोधी पार्टी के कुछ बंदे भी अपने कब्जे मे आ जायेगे

बाकी सारी जनता आपके ही गुण गा रही है,पर राजकुमार के लिये वक्त ठीक नही चल रहा राजपुरोहित का कहना है कि उन्हे एक सौ एक दलितो के घर जाकर मांग कर खाना चाहिये इस टोटके के बाद राजकुमार के राजयोग मे कोई परेशानी नही आयेगी,एक पंथ दो काज हो जायेगे , राजकुमार को जनता के बीच भेज कर दिखवा लीजीये,महारानी को बात जमी,और राजकुमार जनता के बीच हाथो हाथ लिये गये ,राजकुमार किसी भी दलित के घर जाकर अपने आदमियो से खाना बनवाकर जनता के साथ बैठ्कर खाते और अपना बिस्तर किसी के भी घर मे बिछवा कर रातगुजार लेते ,जनता उन्हे देखने मे लगी थी और दमनक करकट के भेजे चेले उनकी इतनी जय जयकार करते कि उन्हे लगता वो वाकई राजकुमार है और जंगल के मालिक,

लेकिन महगांई तो वाकई मे बढ चुकी थी खाने पकाने का ईधन से लेकर खाने का सामान सभी बाजार मे बहुत महंगा मिल रहा था,ऐसे मे करकट दमनक और पिंगल ने मिलकर अखबार वालो को बुला कर बताया कि जनता के पास आज बहुत पैसे है जिनकी वजह से वोह ढेरो वस्तुये खरीद रहे है महारानी के शासन मे  उनका जीवन स्तर बढ गया है आप देखिये आज बाजार मे कोई इलेक्ट्रोनिक सामान खरीदिये हमने चीन से सस्ते सामान आयात करा दिये है,बाजार मे प्रतिस्पर्धा बढी है,लोगो को चाईनीज थाई इतेलियन खाना खाने की आदते पड गई है जिसके वजह  से जंगल मे उपलब्ध देसी खाना हमने विदेशो मे बेचने वाले किसानो को सबसिडी देकर मोटी कमाई करवाई है देखिये शराब की बिक्री के आकडे बताते है कि जनता के पास बहुत पैसा है हमने जो माल खुलवाये है,दुनिया भर की बडी बडी कम्पनी के जंगल मे खुले आऊट लेट बताते है कि महंगाई कही नही है घंटॊ लाईन मे लग कर फ़िर कही अंन्दर जाने का नंबर आता है,अभी हम आपलोगो की ही मांग पर  जुए के अड्डो को कानूनी रूप देने मे लगे है,और आप कहते है महंगाई बढ रही है  ?

आपलोग सिर्फ़ अपना अखबार चलाने के लिये रोज गलत खबरे दे रहे है,अगर आप इस वक्त हमारा सहयोग नही करेगे तो यकीन रखियेगा हम भी पहले की तरह आपलोगो को पदमश्री वगैरा नही दे पायेगे

आप लोग ऐसा कीजीये इस वक्त हमे आपकी और आपके अखबार या चैनल को सरकारी सहायता की जरूरत है. हर दस मिनिट बाद ये एड हर दस मिनिट मे आपके चैनल पर दिखाई देगे,लेकिन अगर अभी भी आप महंगाई का रोना जारी रखते है तो विज्ञापन को भूल ही जाईये,

आने वाले वक्त मे बच्चे से लेकर बूढे तक की जबान पर यही विज्ञापन होगा लोग महंगाई भूल चुके होगे.

बस उसी दिन से जंगल के हर बडे बच्चे के मुंह से यही निकल रहा है बिंदास बोल कंडोम बोल ,सरकार महंगाई शब्द को ही कंडम कर चुकी है,महारानी और राजकुमार जोश मे है ,करकट दमनक और पिंगल मिलकर राजकुमार को गद्दी पर बैठाने की जोर शोर से घोषणा मे वयस्त है जंगल की जनता हमेशा की तरह तॄस्त है.

साभार: http://pangebaj.blogspot.com/2008/04/blog-post_17.html

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