Home | आलेख | रियलिटी शोज की रियलिटी
Newsletter
Email:

रियलिटी शोज की रियलिटी

Font size: Decrease font Enlarge font

जिस प्रकार मनुष्य को जीवित रहने के लिये हवा, पानी की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार से आज के दौर में किसी भी टी.वी. चैनल को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिये उस पर कम से कम एक रियलिटी शो का दिखाया जाना अनिवार्य हो गया है। आजकल टेलीविजन के सारे चैनलों पर रियलिटी शो की बाढ सी गयी है। इन रियलिटी शोज ने समाज के युवा वर्ग में हलचल सी मचा दी है। आजकल हर युवा इंडियन आइडियल, सारेगामा चैम्पियन या फेम गुरुकुल में भाग लेना चाहता है। चाहे उसे संगीत का , , भी ना आता हो।

टेलीविजन पर रियलिटी शोज की शुरुआत कब और कहां से हुई, इस बात का कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं परन्तु १९९२ में सैटेलाइट चैनलों के पदापर्ण के बाद जी.टीवी का अंताक्षरी ही पहला रियलटी शो था। पर उस शो की थीम बहुत ही सरल थी। उन्होंने घर के अन्दर चार-पांच लोगों के मध्य केली जाने वाली अंताक्षरीको एक नये रूप में सारे भारतवासियों के सामने रखा। चूंकि अंताक्षरी के खेल से लगभग सभी लोग परिचित थे इसलिये जनमानस से जुड़े रहने के कारण ये शो काफी लोकप्रिय तथा सफल भी रहा।

दरअसल फिल्म तथा टेलीविजन उद्योग में अपने अलग ही तौर-तरीके हैं। यहां ज्यादातर निर्देशक रिस्क लेकर किसी नये विषय पर फिल्म या टी.वी. शो नहीं बनाना चाहते। पर जब कोई साहसी निर्देशक किसी नये विषय या थीम पर कोई कार्यक्रम बनाता है और वह कार्यक्रम सफल हो जाता है तो हर निर्देशक उसी भेड़चाल में शामिल हो जाता है और हर दूसरा निर्देशक उसी विषय को लेकर शो या फिल्म बनाने लगता है। परन्तु ये भेड़चाल निर्देशकों की क्रियेटिविटी को तो समाप्त करती ही है पर साथ साथ में दर्शकों को भी हर चैनल पर लगभग एक जैसे कार्यक्रम देखने के लिये मजबूर करती है। जिस तरह से एक समय में सास-बहू के धारावाहिकों का चारों तरफ बोलबाला था। एकता कपूर ने क्योंकि क्या बनाया तो सारे चैनल्स पर सास-बहू के सीरियलोंकी बाढ सी गयी। फिर आयी कामेडी की बारी। इस बार भी कामेडी सीरियलों ने हर चैनल पर अपनी जगह बना ली। अब जमाना है रियलिटीशोज का। जाहिर है आजकल हर चैनल अपनी टीआरपी को बनाये रखने के लिये रियलिटी शोज का सहारा ले रहा है। आज से कुछ सालों पहले तक टीआरपी किस चिड़िया का नाम है ये कोई नहीं जानता था, क्योंकि पूरे देश में केवल दूरदर्शन का ही एकछत्र राज्य था। पर जिस प्रकार से विज्ञान ने प्रगति की है, उसे देखते हुए आजकल टी.वी. चैनलों की इतनी भीड़ टी.वी. पर गयी है कि उनकी गिनती करना भी असम्भव सा प्रतीत होता है।

हर रियलिटी शोज में भाग लेना वाला प्रतिभागी इस गलतफहमी में रहता है कि अगर उसने एक बार इस प्रतियोगिता को जीत लिया तो वह रातों रात सफलता के शिखर पर पहुंच जाएगा। वह उस सफलता को एक दिन में हासिल करना चाहता है जहां पहुंचने के लिये अन्य स्थापित कलाकारों ने वर्षों तपस्या की। इस कथन में अगर जरा भी सच्चाई होती तो बताइये कि सबसे पहले इंडियन आइडल के खिताब से नवाजे जाने वाले अभिजीत सावंत आजकल कहां है, इसकी खबर किसी को क्यों नहीं है? सबसे पहले लाफ्टर चैलेंज का खिताब जीतने वाले सुनील पाल १०-१५ कलाकारों की भीड़ वाली बी ग्रेड की फिल्मों में काम करके क्यों अपनी प्रतिभा नष्ट कर रहे हैं?

इन रियलटी शोज में जीतने के लिये जो मापदण्ड तय किये गये हैं वह भी कम हास्यास्पद नहीं है। किसी भी प्रतिभागी को जीतने के लिये शायद उम्दा प्रदशर्न से अधिक उम्दा संख्या के वोटों वाले एस.एम.एस. की जरूरत होती है। जिन्हें दर्शकों से अधिक से अधिक संख्या में भेजने की अपील की जाती है। भला ये क्या तरीका हुआ किसी प्रतिभागी की प्रतिभा को आंकने का। यह समझ पाना बहुत ही मुश्किल है कि दर्शक किस आधार पर किसी प्रतियोगी को वोट करते हैं, जबकि वह उस कला की विधाओं से बिलकुल अनभिज्ञ होते हैं। ये एस.एम.एस. तो केवल फोन कम्पनियों की गाढी कमाई का साधन होते हैं। जिनमें इन रियलिटी शोज का भी एक बड़ा हिस्सा होता है।

आजकल हर रियलिटी शो में एक ना एक विवाद तो देखने को मिल ही जाता है, क्योंकि बिना विवाद के कोई भी रियलिटी शो ऐसा है, जैसे बिना तड़के की दाल। दरअसल, यह विवाद किसी भी रियलिटीशो को चर्चित करने का बहुत ही सरल उत्तम साधन है। साथ ही ये विवाद शो की टी.आर.पी. भी बढा देते हैं।

इस तरह की प्रतियोगिताओं का आव्हान करने वाले निर्मातानिर्देशक आपस में ही गला-काट प्रतिस्पर्धा का शिकार हो रहे हैं। जो कि बहुत ही घातक है। परन्तुयह लोग जानते हैं कि दर्शकों को ज्यादा समय तक बेवकूफ बनाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है, इसलिये वह इन रियलिटी में कुछ इस तरह का माहौल बनाते हैं कि दर्शक इनसे बंधा रहे। वर्तमान समय में तैयार हो जाइये क्योंकि हो सकता है कि आने वाले दिनों में हमें आपको एक नयी थीम या विषयपर बहुत सारे टेलीविजन धारावाहिकों की एक नई फसल देखने को मिले।

Comments (2 posted):

सौरभ शर्मा on 15 July, 2007 07:06:13
avatar
लेख अच्छा है। मैने खुद इंडियन आयडल का टेस्ट दिया और उसमें तीसरे राउण्ड तक पहुंचा। पर वहां जाकर जो अव्यवस्था देखी उससे मन खट्टा हो गया। यह सारे रियलिटी शो कमाई का साधन बने हुए हैं।
अश्विनी त्रिपाठी, (राष्ट्रीय सहारा) नई दिल्ली on 15 July, 2007 07:14:16
avatar
आपका लेख सराहनीय है। रियलिटी शो की असलियत पर से आपने पर्दा उठाने की कोशिश की है। अपना प्रयास जारी रखें। आपके लेखन में नयापन है। उम्मीद है शीघ्र ही सुधार होगा। वैसे क्या हम अपने समाचार पत्र में इस लेख का उपयोग कर सकते हैं?

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image:

  • email Email to a friend
  • print Print version
  • Plain text Plain text
Tags
No tags for this article
Rate this article
5.00