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अरे ओ दकियानुसी!!!

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समय बदलता जाता है. मान्यतायें बदलती जाती हैं. हम बदलते जाते हैं.

जब भारत में रहते थे तब कोई भी मित्र सर मुंडाये मिल तो भर जाये. हम झट से अपना मुँह तुरंत उतार लेते थे झूठमूठ और बस, पूछ बैठते थे कि भाई, कब हुआ, कैसे हुआ? क्या बीमार थे?

वो भी सर झुकाये बताता कि हाँ, पिता जी गुजर गये. कोई खास बीमार तो नहीं थे. बस, बुढ़ापा था. रात में खाना खा कर सोये और सुबह.....!!! फिर उसकी आँख भर आती. आगे का हम एकस्ट्रा समझदारी में खुद समझ जाते कि सुबह वो जागे नहीं. उसके कँधे पर हाथ धरते. ढाढस बंधाते और तैहरवीं का निमंत्रण सुनश्चित करते.

बस उसके बाद, एक तेहरवीं की दावत..खुले आम सूतमसात....डट कर भोजन....और फिर सब नार्मल. अगले गंजे का इंतजार.

कितना आराम था. मुंडा सर मतलब शोक का संदेश. न पूछना पड़े और न बताना पड़े. सब कुछ अपने आप में कहता सर. पूर्णतः चमकता सर मतलब तेहरवीं का निमंत्रण पत्र. यह होती है संस्कृति..बिना बोले सब कुछ कह जाती है. जैसे हमारे जमाने की भारतीय कन्या. बस, प्रेमाग्रह के जबाब में पैर के अंगूठे से जमीन कुरेदना और नज़रें झुका देना मात्र, स्विकारोत्ति का प्रमाण पत्र था.

समय बदल गया है. अब तो मुँह बा कर भी कन्या हाँ बोल दे तो भी शंका बनी ही रहती है कि सच में हाँ कहा है कि सिर्फ फन के लिये कि यार, मैं तुम्हारा रियेक्शन देखना चाहती थी. यू आर टू सेन्टीमेन्टल- अर्थ, बड़े दकियानुसी हो जो हाँ को हाँ समझते हो.

यहाँ मित्र मिले. सर मुंडाये हुये. हमने मुँह उतार लिया. हमारे साथ एक और यहाँ के लोकल संस्कारी मित्र थे. वो उसे देखकर तुरंत बोले-औह मैन!! शेव्ड़-लूकिंग सो कूल-वोव!!!! ग्रेट ड्यूड---हम तो भौचक. एक तो अगले के घर गमीं हो गई और यह बंदा बोल रहा है-शेव्ड़-लूकिंग सो कूल-वोव!!!! मगर यह क्या, अगला भी हंसते हुये कहने लगा कि भाई, बाल साथ नहीं दे रहे थे तो सोचा कि शेव करा लें..मे बी आगे ठीक आ जायें.

और फिर वो कूल ड्यूड मेरी ओर मुखातिब हुआ...वाटस रांग विथ यू? कोई शोक वगैरह तो नहीं हो गया घर में..आपका उतरा चेहरा देख कर लग रहा है कि घर में कोई गमीं हो गई है.

अब उसको कैसे समझाऊँ कि भईये, यह चेहरा तो तेरी खोपड़ी देखकर आदतन उतर गया था. हमारे यहाँ तो सब भला चंगा है. यह तो जमाने में ही आग लगी है जो हमारा चेहरा गड़बड़ नज़र आ रहा है. हम बहुत दकियानुसी जो हैं न!!!

साभार : http://udantashtari.blogspot.com/2007/05/blog-post_07.html

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