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हमारे समय के अंधेरे और प्रेमचंद की याद

प्रेमचंद की कृतियों में भारतीय समाज के विस्तृत चित्र मिलते हैं. उनका साहित्य ऐतिहासिक दस्तावेज की तरह है. शायद ही ऐसा कोई चरित्र या सामाजिक
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सिवाय चुनाव पर्व के, क्या है जो लोकतंत्र के होने का अहसास कराये?

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मैनेजर पांडेय हिंदी आलोचना के क्षेत्र में जाना-माना नाम है. इसी के साथ वे अपने सजग राजनीतिक नज़रिये के लिए भी जाने जाते हैं. प्रभात ...
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आज़ादी, मगर कैसी और किसके लिए?

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प्रेमचंद के उपन्यास गबन (1931) में देवीदीन ने यह पूछा था, `साहब, सच बताओ, जब तुम सुराज का नाम लेते हो, उसका कौन-सा रूप तुम्हारी ...
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उन्हें हमेशा दूसरों की ही चिंता रही

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जन्म और मृत्यु के बीच का फासला एक अनिवार्य नियति है, लेकिन इतिहास में हर कोई दर्ज नहीं हो पाता. इसके लिए इस फासले को ...
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मधुमेह : कुछ देसी नुस्खे और योग

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डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन ...
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खुदरा पर खुलकर मैदान में

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खुदरा कारोबार के संगठित योजना पर असंगठित क्षेत्र ने धावा बोलना शुरू कर दिया है. 22 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मेरठ, मुजफ्फरनगर , ...
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लागिन