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आउटसोर्सिंग के आगे जहाँ और भी हैं

हाल में “वर्ल्ड इज़ फ़्लैट” पढ़ी। बढ़िया किताब है। कम-से-कम हिन्दुस्तानी तो इसे पढ़कर ख़ुश हो ही सकते हैं। इसके शुरू के अध्यायों में भारत
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विज्ञापनों पर सेंसर / आचार संहिता क्यों नहीं ?

आजकल जमाना मीडिया और विज्ञापन का है, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो अथवा इलेक्ट्रानिक मीडिया, चहुँओर विज्ञापनों की धूम है । इन विज्ञापनों ने सभी ...
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कल का कर्ज-1

शाम से आंख में नमी-सी है नगरों-महानगरों में हम सभी अपनी दुनिया में मस्त हैं। सांप्रदायिकता पर चिंतित होते हैं, मोदी को लेकर गालीगलौज तक ...
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कौन लेगा खबरपालिका की बदहाली की खबर ?

अखबार की दुनिया इन दिनों खासी बेचैन है । बाजार के दबाव और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच उलझी अखबारी दुनिया नए रास्तों की तलाश में ...
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पेटेंट और पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता

प्रकृति में पायी जाने वाली वस्तुओं के गुणों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है पर प्रकृति में प्राप्त वस्तुओं या इसके गुणों का प्रयोग ...
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नक्सलवाद का विकृत चेहरा

नक्सलवाद भटका हुआ आंदोलन है । यह अधैर्य की उपज है । इसकी बस्ती में मानवता की कोई बयार नहीं बहती । यह पशुयुग की ...
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लागिन