छलांग लगाने से पहले
जब आप गाड़ी चला रहे होते हैं और गलती से आपकी गाड़ी किसी गलत रास्ते पर चली जाती है, तो आप क्या करते हैं। आप उसे दुरुस्त करते हैं, थोड़ी दूर तक जाने के बाद आप यू-टर्न मिलते ही वापस लौटते हैं और फिर सही रास्ते की तरफ बढते हैं। इस काम में आपको पांच-दस मिनिट अतिरिक्त लग जाते हैं। या उतना समय, जितने में आपको अहसास होता है कि आप गलत आ गए।
ठीक ऐसा ही कैरियर में भी होता है। मान लीजिये कि आपने डाक्टरी की पढाई की है और उस वक्त आपके मन में फिल्में बनानें को लेकर गजब का आकर्षण पैदा हुआ। आप फिल्मों में चले गये। पांच साल बाद आपको लगता है कि नहीं, फिल्म निर्माण मेरा क्षेत्र नहीं है। फिल्में देखना भले मुझे पसंद है, पर उसे बनाने में मेरी दिलचस्पी नहीं है। वह सिर्फ एक क्षणिक आकर्षण था। अब मुझे वापस डाक्टरी की प्रेक्टिस करना चाहिए। आप अपने क्षेत्र में लौटते हैं। देखते हैं कि आपके साथ के जो पासआउट थे, वे अब लाखों में खेल रहे हैं। आप आते ही खुद की प्रेक्टिस शुरु नहीं कर सकते। आप सोचते हैं कि बेहतर है, किसी अच्छे अस्पताल में नौकरी की जाए। आपके पास डिग्री है, लेकिन अनुभव नहीं। यहां आपको समझौता करना ही पड़ेगा। अस्पताल वाले अगर आपको सिर्फ पच्चीस हजार रुपये ही देंगे, तो आपको मान लेना होगा, क्योंकि आप फिर से शुरुआत करने जा रहे हैं। और शुरुआत अक्सर छोटी ही होती है।
मैनेजमेंट की भाषा में इसे `लीप फ्रॉग स्ट्रैटजी` कहते हैं। आपने देखा होगा कि जब मेंढक एक लंबी छलांग लगाने वाला होता है, तो वह दो सेकंड के लिये पीछे झटका लेता है, बदन में सांस भरता है और फिर छलांग लगाता है। अगर वह पीछे की ओर झटका न ले, तो कूदना मुश्किल हो जाएगा। कैरियर में ऐसा दौर आता है, जब आपको समझौता करते वक्त थोड़ी देर के लिये पीछे झटका लेना पड़ता है। आप खुद को जितना योग्य समझते हैं, उससे कम कीमत में आपको काम करना पड़ सकता है। यह आपकी अपनी छलांग को बैलेंस करने के लिये बहुत जरूरी है। यह दौर छोटा ही होता है, क्योंकि अगर आपमें ताकत और प्रतिभा है तो आप एक लम्बी छलांग लगा ही लेंगे।



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