सफलता और असफलता
हर व्यक्ति की जिन्दगी में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जब वो अपने आपको तथा अपने भविष्य को अंधकार की गर्त में जाता महसूस करता है... कड़ी और जी - तोड़ मेहनत के बाद भी जब उसे निराशा महसूस होती है तो उसे अपना जीवन व्यर्थ नजर आने लगता है। शायद ही आपसे में आज कोई एक इंसान नहीं होगा जब उसने अपने जीवन में निराशा और हताशा महसूस न की हो।
दुनिया आपको कई व्यक्ति ऐसे मिलेंगे जो निराश होकर आगे बढ़ना बन्द कर देते हैं, उनसे अगर आप बात करेंगे तो उनका जवाब होता है कि मेहनत का कोई फायदा नहीं होना है, बेकार है...बस ये बेकार शब्द आपकी जिन्दगी को बेकार बना देता है। मानाकि हमें 100 बार असफलता मिली पर जब इतनी असफलताओं के बाद किसी को सफलता मिलती है वह ज्यादा स्थाई होती है।
क्या आपको पता है कि महान वैज्ञानिक थामस अल्वा एडीशन को अपने प्रयोगों में 175 बार असफलता का स्वाद चखना पड़ा था... सोचिये वह निराश हो जाते तो क्या आज उनके किये अविष्कारों का हम लाभ उठा पातें। ग्राहम बेल ने जब टेलीफोन का अविष्कार किया तो पहले वह 17 बार असफल हो चुके थे। अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन 35 वर्ष की आयु में बेरोजगार थे, 42 वर्ष की आयु में खाने के लिये उधार मांगा करते थे, 48 वर्ष की आयु में राष्ट्रपति के चुनाव में हारे... 52 वर्ष की आयु में फिर चुनाव हारे.. 56 वर्ष की आयु में फिर चुनाव हारे और आखिर में 60 वर्ष की आयु में अमेरिका जैसे देश के सबसे सफल राष्ट्रपति साबित हुए। ये तो कुछ ही उदाहरण है... प्रेरणा लें इनसे और आगे बढे...बेझिझक और बखटके... आपका सफल भविष्य आपका इंतजार कर रहा है...



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