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अनुभव भी याद करें लगातार

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पुरानी कहावत है कि झूठ के पांव नहीं होते। इसीलिये वह खड़ा भी नहीं हो पाता। बहुत लोग सिर्फ झूठ बोलते ही नहीं हैं, बल्कि बाकायदा उसे लिखकर दर्ज भी कर देते हैं। बायोडाटा में झूठ लिखने में भी कई लोग असहज महसूस नहीं करते। जैसे एक कर्मचारी ने दो साल एक अच्छी कम्पनी में गुजारे औऱ तीन साल एक खराब कम्पनी में। उसने अपने बायोडाटा में से वे तीन साल गायब कर दिये, क्योंकि उसे लगा कि बायोडाटा में इतनी खराब कम्पनी का जिक्र करना उसके कैरियर ग्राफ को खराब कर रहा है। उसने बहुत सफाई से उन तीन बरसों को दो टुकड़ों में दो बड़ी कम्पनियों के साथ जोड़ दिया। यानी एक बड़ी कम्पनी में उसने दो साल गुजारे थे, तो उसे साढे तीन साल कर दिया और दूसरी बड़ी कम्पनी में उसने एक साल गुजारा था उसे ढाई साल कर दिया। ऐसा करके वह निश्चिंत था।

बड़ी कम्पनियां बायोडाटा को बहुत अच्छी तरह चेक करवाती हैं। वे न सिर्फ आपसे उसका रिकार्ड मांगती है, बल्कि सिक्योरिटी एजेंसियों के इंवेस्टीगेशन अफसरों की मदद लेकर बाकायदा जांच भी करवाती है। उस कर्मचारी को चेक करने का काम एक सिक्योरिटी एजेंसी में काम करने वाले डिटेक्टिव को दिया गया। डिटेक्टिव हर उस कम्पनी में गया, जिसका जिक्र उस बायोडाटा में था। वहां उसने एचआर से उस कर्मचारी के रिकार्ड के बारे में पता किया और पाया कि उसने आंकड़ों में गड़बड़ी की है। बस। उसका पत्ता कट गया। एक बार के लिये नहीं, उस कम्पनी से हमेशा के लिये। क्योंकि जो व्यक्ति बायोडाटा में झूठ लिखता है, वह कहीं भी झूठ का सहारा ले सकता है। झूठ का सहारा किसी को धोखा देने के लिये किया जाए, इससे गड़बड़ और क्या हो सकता है।

आपने अपने जीवन के चार अनमोल बरस किसी थर्ड क्लास कम्पनी में गुजारे हैं, तो यह एक सच्चाई है। इसे बताने में गुरेज कैसा। हर आदमी के जीवन में ऐसा मौका आता है, जब वह अपनी मर्जी का काम नहीं कर पाता। किसी के लिये यह चरण एक साल का हो सकता है तो किसी के लिये चार साल का। आप उसे अपने बायोडाटा में जोड़िये और बातचीत के दौरान यह बताइये कि बैड पैच में मैंने यहां भी काम किया है और इससे यह सीखा है कि काम को फलां-फलां स्टाइल में नहीं करना चाहिए। उस कम्पनी में काम इसी स्टाइल में होता था। इसीलिये वह अच्छी कम्पनी नहीं बन सकी। जो बुरा अनुभव है, वह भी बहुत कुछ सिखाता है। आप उस सीख को ले लेना चाहते हैं, लेकिन उस बुरे अनुभव को भूल जाना चाहते हैं या किसी के सामने उसका नाम तक नहीं लेना चाहते। यह ईमानदार व्यक्ति की निशानी नहीं है। आपको अगर अपनी जिन्दगी में आगे बढना है, कुछ कर दिखाना है, कामयाबी पाना है... तो अपने स्वयं के जीवन के साथ ईमानदारी बरतना सीखिये। आप अपनी जिन्दगी के साथ ईमानदार रहेंगे तो दुनिया में कोई भी आपको धोखा नहीं दे पाएगा... अपने सुखद की भविष्य की ओर अपना पहला कदम जैसे ही उठाएं उसमें कोई छल कपट नहीं होना चाहिए। याद रखिये ईश्वर सभी को एक मौका जिन्दगी संवारने के लिये देता है, अगर आप उस मौके का छल प्रपंच का इस्तेमाल करके लाभ उठाना चाहते हैं तो कदापि सफल नहीं हो पाएंगे। हमेशा याद रखिये अच्छा कैरियर बनाना आपके ही हाथों में है... किसी ओर से नहीं।

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