संघर्ष निखारता है आदमी को
एक युवा सज्जन हैं। एक कम्पनी मे वाइस प्रेसीडेंट के पद पर है। खूब मन लगाकर काम करते हैं और हर वक्त एक चिंता में घुलते रहते हैं कि सीनियर वाइस प्रेसीडेंट कैसे बना जाए। एक दिन अपने दफ्तर में मेहमानों के साथ बैठे थे कि केबिन में उनका जीएम आया और बुरी तरह भड़क गया। यहां की बात, वहां की बात, यह तोहमत, वह तोमत। दो मिनट में उन्हें मटियामेट कर गया। सज्जन मुंह खोले उसे आते, बोलते और फिर जाते देखते रह गये। कभी वह खुला दरवाजा देखते, कभी सामने बैठे मेहमानों को। ऐसा अक्सर होता है। वह अभी युवा हैं। ज्यादा अनुभव नहीं है। अपने से ज्यादा उम्र में ज्यादा कर्मचारियों को हैंडल करने में भी दिक्कत होती है। सो, जब जीएम टाइप के मैनेजरों को गुस्सा आता है, उन पर निकाल कर चले जाते हैं। हालांकि सज्जन उन सबसे पद में सीनियर हैं।
आजकल कम्पनियों में युवा शक्ति पर काफी विश्वास किया जाता है। कम्पनी के महत्वपूर्ण पदों पर युवाओं को बिठाया जाता है। ऐसे में उनसे उम्र में ज्यादा कर्मचारियों को कुंठा तो होती ही है। युवाओं में भी जल्दी बड़ा पद पा लेने की लालसा है। यह नहीं समझते कि फलां पद के लिये इतने साल संघर्ष ही इसिलये कराया जाता है कि वहां तक पहुंचने का अनुभव मिल जाए। प्रतिस्पर्धा ऐसी कि युवाओं को बिना वांछित अनुभव पाये बड़ा पद मिल जाता है। जब वे परिस्थितयों के साथ टैकल नहीं कर पाते, तो ऐसी अपमानजनक स्थितियां आ जाती हैं। ऐसे में आपकी जूनियर आपको डांटे, तो आप जवाब भी नहीं दे पाते, क्योंकि आपको पता है गलती आपकी है। ऐसे लोगों के साथ एक और दिक्कत होती है वे छोटी कम्पनियों में बड़ा पद तो पा लेते हैं, लेकिन जब बड़ी कम्पनी में नौकरी के लिये कोशिश करते हैं, तो जवाब मिलता है कि ठीक है, असिस्टेंट मैनेजर के रूप में आ जाओ। अब वे जा भी नहीं सकते, क्योंकि उन्हें अपने पद से इतना मोह हो गया है कि उसके नीचे जाना भी नहीं चाहते। वे एक ऐसे दुष्चक्र में पड़ जाते हैं जिससे निकलना मुश्किल है, तो उसमें रहना और भी मुश्किल।
हर युवा को लगता है कि उसके साथ ऐसी कहानी नहीं होने वाली। वह आसानी से टैकल कर लेगा। पर यह यूनिवर्सल कहानी है। किसी का अपमान दिख जाता है, तो किसी का नहीं दिखता। कैरियर के शुरुआती दौर में यानी तीस-चालीस बरस की उम्र तक तो आपको पद की ज्यादा चिन्ता नहीं करनी चाहिए। जो पद आसानी से मिल रहा है, उसे ले लेना चाहिए। हां, इस समय पैसे की चिंता जरूर करनी चाहिए। इस समय पैसा महत्वपूर्ण होता है, पद नहीं। एक समय के बाद जब आपके भीतर अनुभव का खजाना भर जाता है, और आपको लगता है कि अब इसे बांटा जा सकता है, तो आप बड़े पद के लिये जाइये। तब आपको उस पद पर दूसरे लोग भी स्वीकार करेंगे।



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