हाथ में लिये काम की महत्ता
एक सज्जन अपने ड्राइंग रूम में बैठे लैपटाप पर कुछ लिख रहे थे। जालीदार दरवाजा था, जिसमें से बाहर का सबकुछ दिख रहा था। टाइप करते हुए सज्जन को लगा कि कोई दरवाजे पर आकर खड़ा है। पर सज्जन टाइप करने में व्यस्त थे। आभास होने के बाद भी उन्होंने उस तरफ सिर उठाकर नहीं देखा। वो 2-3 मिनिट तक टाइप करते रहे, अचानक उनका टाइप करना रुका और उन्होंने दरवाजे पर देखा, कारपेंटर खड़ा था। उन्होंने कहा कब से खड़े हो। अंदर आ जाना चाहिए था। कारपेंटर ने कहा, नहीं साब, मैं आपको डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था। आप बिजी थे। मैने सोचा, पहले आप हाथ का काम पूरा कर लें।
जो काम हाथ में लिया गया है, उसे पूरा करके कहीं और देखने का जो महत्व होता है, उस कारपेंटर से ज्यादा कोई नहीं जानता होगा। उसका काम पूरी तरह हाथ का हुनर पर है। हाथ एक सूद फिसला कि कटाई गलत हो जाएगी। हथौड़ी का निशाना एक पल के लिये चुका, तो उंगली खून से लाल हो जाएगी। जिस वक्त जो काम हाथ में है, उस वक्त वही करो। अगर दूसरी ओर देखना है, तो पहले काम रोको। अगर दूसरी ओर देखना 5 मिनिट टाला जा सकता है, तो बेहतर है कि पहले हाथ का काम पूरा करो। यह उस कारपेंटर की परिपक्वता थी, जो बड़े-बड़े साहबों में भी नहीं पाई जाती। कई बास ऐसे होते हैं, जो अपने कर्मचारियों पर महज इसलिये चिल्लाते हैं कि तीन बार तुमको बुरा लिया, अब आ रहे हो। या प्यून पर चिल्लाते हैं कब से घंटी बजा रहा हूं, अभी तक नहीं सुना। ऐसे अधीर किस्म के बासों या अधिकारियों को हाथ के काम का महत्व नहीं पता होता। जो क्लर्क अपनी मेज पर बैठा एक महत्वपूर्ण और लम्बा हिसाब लगा रहा है, उसे अगर बीच में ही रोक दिया जाए, तो उसे पूरा हिसाब फिर लगाना पड़ सकता है। जो आदमी कम्प्यूटर पर एक पैराग्राफ टाइप कर रहा है, अगर उसकी लाइन बीच में ही छूट जाए, तो हो सकता है कि वह दुबारा उसी भाव में टाइप ही न कर पाए।
हर आदमी चाहता है कि उसके हाथ के काम को एक तय विराम पर ही छोड़ा जाए। काम फिर भी अधूरा ही रहेगा, लेकिन एक विराम पर। वह अल्पविराम भी हो सकता है या थोड़ा लम्बा। इसलिये बास और कर्मचारी दोनों को समझना चाहिए कि अगर कोई आदमी कोई काम कर रहा है, तो उसकी वजह से वह काम अधूरा न छूट जाए।



del.icio.us
Digg
Comments (0 posted):
Post your comment