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बनाएं रखें पुराने सम्पर्क

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जब आप एक कम्पनी छोड़कर दूसरी कम्पनी में जाते हैं, तो दरअसल तब आप सिर्फ कम्पनी बदलते हैं, इंडस्ट्री नहीं. ऐसा बहुत कम बार होता है कि व्यक्ति इंडस्ट्री ही बदल दे. यानी आपके काम का बुनियादी स्वरूप वही रहता है. आप अगर साबुन बनाने में विशेषज्ञता रखते हैं, तो दूसरी में जाकर आप साबुन ही बनाने का काम करेंगे. ऐसा नहीं है कि आप सीधे साबुन की कम्पनी से जूते की कम्पनी में चले जाएं, अगर आप प्रोडक्शन से नहीं, मार्केटिंग से भी जुड़े हैं, तब भी अक्सर ऐसा ही होता है.

जब आप यहां-वहां होते रहते हैं, तो एक आदमी से कभी अपना सम्पर्क नहीं तोड़ना चाहिए और वह होता है आपका अपना पुराना बास. भले ही पिछली कम्पनी में उसके साथ काम करते हुए आपको दस अलग-अलग किस्म के अनुभव हुए हों, पर वह आपके कभी भी काम आ सकता है. उसे आपके काम और क्षमताओं के बारे में अच्छी तरह से पता होता है. आप उसे एसएमएस करें, फोन करें, मौके पर ग्रीटिंग भेजें और जन्मदिन की बधाइयां दें. महीने-पंद्रह दिन में एक बार बात करें. या यह जताएं कि आप उसकी फिक्र करते हैं.

इंसानों में सम्बंध तभी बनते हैं, जब एक को लगता है कि दूसरा उसकी फिक्र करता है. अगर आप लगातार किसी से बात करते हैं, तो उसे आपके ज्यादातर मूवमेन्ट्स के बारे में पता रहता है. आपकी नई उपलब्धियों को भी वह भले आपके मुंह से सुनें, लेकिन जानता रहता है. अगर उसकी कम्पनी में आपके लायक कोई जगह बने, और आप उसके लगातार सम्पर्क में रहें, गुडबुक्स में रहें, तो वह आपको वापस अपने यहां बुला सकता है.

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