हमेशा ईमानदार रहें
यद्यपि जीवन के हर क्षेत्र में ईमानदारी बड़े काम की चीज है, परन्तु आप जब प्रतिभाशाली बनना चाहते हैं, तो यह और भी अधिक महत्वपूर्ण बन जाती है. यह वह नींव है, जिस पर कई अन्य गुण स्थापित किये जाते हैं, जैसे सम्मान, प्रतिष्ठा और विश्वास. अगर ईमानदारी की नींव कमजोर या दोषपूर्ण है, तो प्रभावशाली व्यक्ति बनना असंभव हो जाता है. जो लोग कुछ समय तक ईमानदारी की कमी छुपाने में सफल होते हैं, उन्हें भी आखिर में असफलता ही हाथ लगेगी और उन्होंने अस्थाई तौर पर जो प्रभाव इस्तेमाल किया है, वह भी खत्म हो जाएगा. ईमानदारी के लाभों के बारे में उसी तरह सोचें, जिस तरह भयानक तूफान के समय आप किसी मकान की नींव के बारे में सोचते हैं.
अगर नींव मजबूत है, तो मकान गरजते पानी का डटकर मुकाबला करेगा. परन्तु अगर नींव में दरारें हैं, तो तूफान का दवाब इन दरारों को और गहरा बना देगा तथा अंत में दवाब की वजह से नींव और उसके साथ ही पूरा मकान ही धाराशायी हो जाएगा. ईमानदारी की परिभाषा नैतिक चरित्र का पालन, नैतिक चरित्र की मजबूती है. नैतिक सिद्धांत लचीले नहीं होते. छोटा सफेद झूठ भी झूठ ही होता है. चोरी तो चोरी ही है चाहे एक रुपये की हो या फिर एक लाख रुपये की। ईमानदारी में यह संकल्प होता है कि व्यक्तिगत लाभ की बजाय चरित्र, वस्तुओं की बजाय लोग, शक्ति के बजाय सेवा, सुविधा के बजाय सिद्धांत और तात्कालिक दृष्टिकोण के बजाय दूरगामी दृष्टिकोण अधिक महत्वपूर्ण होता है.
याद कीजिये फिल्म सरकार में अमिताभ बच्चन का संवाद जो वह अपने बिगड़ैल बेटे से कहते हैं कि नजदीकी फायदे की अपेक्षा दूर के नुकसान के बारे में सोचना चाहिए... जब आप कोई नैतिक सिद्धांत तोड़ते हैं, तो आप ईमानदारी की नींव में छोटी सी दरार बना लेते हैं. और जब मुश्किल समय आता है तो ईमानदारी से काम करना अधिक आसान होने की बजाय अधिक मुश्किल हो जाता है.



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