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क्या आप अच्छे बास हैं

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टीवी पर आपने एक विज्ञापन देगा होगा। हरी साडू नाम का एक बास अपने मातहत के मुंह पर कागज दे मारता है। छोड़ी देर बाद मातहत उसके नाम हरी साडू को इस तरह स्पेल करता है - एच फार हिटलर, ए फार एरोगेंट, आर फार... आदि - आदि। उस समय हरि सा़डू के चेहरे पर जो भाव आते हैं, उन्हें देखना चाहिए। उसे समझ में ही नहीं आता कि वह क्या करे। वह अपने बगल में खड़े आदमी को देखता है और सकते में रह जाता है। हर बास को यह विज्ञापन देखना चाहिए और अपने आप से पूछना चाहिए कि क्या वह भी हरि साडू है।

बास और मातहत में कभी नहीं बनती, यह तो जगजाहिर है। बास कितना भी अच्छा हो या मातहत कितना भी गुणवान, दोनों को एक - दूसरे में खराबी नजर आती है। लेकिन दोनों एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, यह बात ज्यादा जरूरी है। आप बास है, मतलब यह नहीं आप उसे कुछ भी बोल सकते हैं। गलती हो या न हो, आप उसे डांट सकते हैं। कहा तो यह जाता है कि किसी को गलती करने पर भी मत डांटों, उसे बुलाकर समझाओ। उसे भावनात्मक स्तर पर ऐसा बना दो कि अगली बार के लिये सावधान हो जाए। पर ऐसा कितने लोग करते हैं। डांटने में अधिकार का बोध होता है और बास मन ही मन सोचता है कि देखा, कैसे दन्न से उड़ा दिया पट्ठे को, बड़ा उड़ा-उड़ा फिरता था। आप एक ही आदमी को डांट रहे हैं, एक दिन से, एक महीने से, एक साल से... वह कुछ नहीं बोलता। मातहत होने का एक अघोषित किस्म का नियम है कि उससे कुछ बोलने की उम्मीद नहीं की जाती (जैसा मध्ययुग में गुलामों के साथ होता था)। पर वह कब तक नहीं बोलेगा... हर सदी के पास अपना स्पार्टाकस होता है।

हर दफ्तर में मैक्सिमस जैसा एक ग्लेडिएटर होता है, जो लम्बी चुप्पी के बाद सिर्फ एक शब्द कहता है और सम्राट का ताज उछलकर पृथ्वी की परिक्रमा करने लग जाता है। वह एक शब्द कुछ भी हो सकता है - पलटकर कहा गया शब्द। वह गाली भी हो सकता है, वह लम्बे समय की हताशा भी हो सकती है यानी वह ... बस, बहुत हो गया... भी हो सकता है। आप बरसों से डांट रहे हैं और वह एक पलटकर आपको ऐसा बोल देता है कि आप हमेशा के लिये चुप हो जाते हैं। यह उसका अपमान नहीं होता। वह बरसों से अपमान झेलकर कड़क हो चुका है, पर आपका नाजुक ईगो टुकड़ा-टुकड़ा होकर बिखर जाता है। उस दिन आप क्या करेंगे। आपका ग्लैशियर पिघल चुका होगा। क्या आप भी हरि साडू की तरह विजेता की कुर्सी से उतरकर अचानक हारे हुए सम्राट की कुर्सी पर नहीं बैठ जाएंगे।

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