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रुटीन के काम में भी स्टाइल जरूरी

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नेपोलियन ने कहा था कि - सोच सफलता का शुरुआती बिन्दु है, जिस तरह छोटी सी आग से कम गर्माहट मिलती है , उसी तरह कमजोर सोच से कमजोर परिणाम मिलते हैं। आपकी सोच ही आपके भाग्य का निर्माण करती है। क्योंकि सच ही कहा गया है कि यदि आप कुछ सोच सकते हैं तो उसे कर भी सकते हैं। हो सकता है अगली चार लाइन आपकी सोच को ही बदल डालें -

          1. आप वह हैं, जो आपकी गहन इच्छा है
          2. जैसी आपकी गहन इच्छा है, वैसी आपकी आकांक्षा है।
          1. जैसी आपकी आकांक्षा है, वैसा आपका कर्म है।
          2. जैसा आपका कर्म है वैसा आपका भाग्य है।

सबसे पहले यह जाने कि आप जीवन में क्या चाहते हैं। यदि आप यह नहीं जानते तब उसे प्राप्त करने का प्रश्न ही नहीं उठता। इसके लिये सबसे पहले आपको अपना लक्ष्य निर्धारित करना पड़ेगा। अपना दृष्टिकोण, स्वप्न, इच्छा, योग्यता, कौशल, ज्ञान और आवश्यकताओं के अनुसार अपने लक्ष्य का निर्धारण करें। हमेशा सितारों को अपना लक्ष्य बनाएं और उन तक पहुंचने का प्रयास करें। आपके लक्ष्य छोटे स्तर के नहीं होने चाहिए। वैसे भी जो साहसी होते हैं उनके लिये लक्ष्य की कोई सीमा नहीं होती। दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं होता। आपके जीवन में भी कोई बाधा ऐसी नहीं है जिसे पार करना संभव न हो। यदि आप दृढ निश्चय कर लें और उस पर चट्टान की तरह अडिग रहें , तो आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने और उसमें सफलता प्राप्त करने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। छोटी - छोटी बातों को सोचने की बजाय अपनी सोच को व्यापक कीजिये। पीछे की गलतियों को देखने की बजाए आगे की ओर देखें। एक सुनियोजित योजना बनाएं... सुनियोजित इसलिये कि अगर आप योजना बनाने में ही असफल होते हैं तो आप आप असफल होने के लिये योजना बना रहे हैं।

सबसे पहले तो आप यह निर्धारित करें कि आप क्या बनना चाहते हैं - डाक्टर, इंजीनियर , व्यवसायी, एक विजेता, वकील अथवा महान खिलाड़ी। एक बार अपना लक्ष्य निर्धारित करने के बाद न तो किसी अनिश्चय में रहे और न ही हिचकिचाएं और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये लगातार प्रयत्नशील रहें। हो सकता है लोगों को आपकी महत्वाकांक्षाएं हवाई किले या मुल्ला नसीरुद्दीन के सपने की तरह लगे ... या हो सकता है लोग आपका मि. योगी कहकर मजाक उड़ाएं ( यह सीरियल दूरदर्शन पर आया बरसों पहले, और मि. योगी की भूमिका में मोहन गोखले थे )। आप न तो चिंतित हों और न ही मन में डर को हावी होंने दे। जो आज आपको असंभव दिखाई दे रहा है, वह कल, आपके आपके कड़े परिश्रम और सकारात्मक सोच से साकार हो सकता है। बरसों पहले ताजमहल, वायुयान , परमाणु बम, चन्द्रमा पर मानव के कदम सब कल्पनाएं ही तो थीं। सबसे महत्वपूर्ण है आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये कितना परिश्रम करते हैं। आप तो सर्वसुविधा सम्पन्न है , क्यों नहीं कोई ऊंचा लक्ष्य निर्धारित करते आप... बदलिये अपनी सोच को और अपनी विचारधारा को ... सिर्फ यह जाने और समझे कि आप ही अपने भाग्य के विधाता है और अपनी किस्मत के मालिक हैं।दुनिया में अपने आप से बड़ा कोई भगवान नहीं होता है। स्वयं अपने ईश्वर बने और स्वयं अपने आपको रास्ता दिखाएं ... आपकी जिन्दगी स्वयं ही बदल जाएगी।

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