जाते हुए आदमी से ज्ञान मांगो
जब रावण मर रहा था, तब राम ने लक्ष्मण से कहा कि जाकर उनके पैताने खड़े हो जाओ। रावण प्रकाण्ड विद्वान है। इस समय इस बात का कोई मतलब नहीं कि वह हमारा और मानवता का शत्रु था। इस वक्त वह मर रहा है और उससे कुछ सीखना चाहिए। लक्ष्मण रावण के पास गए और रावण ने भी उस मौके पर उन्हें शिक्षाएं दी।
यह पीढी द्वारा दूसरी पीढी के हाथ में अपने अनुभवों और शिक्षाओं के हस्तांतरण का बहुत अच्छा उदाहरण है। यहां रावण को खलनायक और लक्ष्मण को नायक के तौर पर न देखा जाए, बल्कि दोनों को सिर्फ अलग-अलग पीढियों के रूप में देखा जाए। जिन्दगी में हमें कई ऐसे मौके मिलते हैं, जब हमें अपनी पिछली पीढी को विदा कहना पड़ता है। जैसे एक उदाहरण है कि हम एक दफ्तर में काम करते हैं। हमारे सामने एक पुराना कर्मचारी रिटायर होता है। एक कम्पनी के रूप में हम उससे उसकी दराज और अलमारी की चाबियां ले लेते हैं। उसे एक फेयरवेल पार्टी दे देते हैं। उस पार्टी में उसकी तारीफ में कुछ शब्द कहते हैं। वह अपनी भावनाओं और छोड़ते समय होने वाले दुख का इजहार करता है। इसके बाद वह अपने घर चला जाता है और रिटायर जीवन जीने लगता है। हम अपने दफ्तर में रोज की तरह काम करने लगते हैं। हम अपने आसपास एक आदमी की अनुपस्थिति को महसूस नहीं करते।
हम उस उस आदमी से सिर्फ चाबियां लेते हैं, इसलिये उसे भूल जाते हैं। अगर उससे कुछ और लिया होता तो क्या उसे आसनी से भूल जाते। हमें उससे ज्ञान लेना चाहिए था। उसके रिटायर होने से महीना भर पहले ही रोज उसके पास जाकर आधा एक घण्टा बैठना चाहिए था। उससे जानना चाहिए था कि उसने जो काम किया, वह तो इतना मुश्किल था, फिर भी उसने इतनी आसानी से कैसे कर लिया। वह अपने कामों को निपटाने के लिये कौन से तकनीक अपनाता था। आदि - आदि। जब वह हमें इन सारी बातों के बारे में बताता, तो हमने दरअसल सही तरीके से अनुभवों का हस्तांतरण किया होता। तब हम उसे कभी नहीं भूलते। कई बार आपने भी किसी की अनुपस्थिति में ऐसा ही सोचा होगा कि पता नहीं यार वो आदमी कैसे इतना सारा काम करता था, देखो नहीं है तो दिक्कत हो रही है। जब भी कोई मुसीबत आती, हमें उस आदमी द्वारा बताए गए रास्तों की याद आती।



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