छूलो आसमां: निगेटिव मतलबी और फोकस्ड पॉजीटिव
शहर में दूसरी जगह स्थित कम्पनी की ब्रांच में बास रोज फोन करता था. वहां इंचार्ज से वह काम के बारे में पूछताछ करता, उसकी समस्या का निराकरण करता है, जो प्लानिंग होती, उसके बारे में पता देता और दो-तीन मिनिट में फोन रख देता. ऐसा रोज होता था.
एक इंचार्ज ने बास से हंसते हुए कहा, सर, आप बहुत मतलबी हैं. सिर्फ काम के बारे में पूछते हैं और फोन रख देते हैं. बास ने कहा, मैं मतलबी नहीं हूं, फोकस्ड हूं. मेरा पूरा ध्यान अपने काम पर है, इसीलिये मैं सिर्फ काम के बारे में ही पूंछ पाता हूं.
फोकस्ड या मतलबी होना लगभग एक ही बात है. अगर आप को काम से मतलब है, तो काम की बात करेंगे. आपको किसी और बात से मतलब है, तो सिर्फ वही बात करेंगे. यानी जिस बात से आपको मतलब है, आप सिर्फ वही बात करेंगे और सुनेंगे. मतलबी आदमी भी तो यही करता है कि सिर्फ अपने मतलब की बात करे. फिर भी दोनों में फर्क है. शब्द बहुत करामाती होते हैं. वे एक ही मतलब के होने के बाद भी अलग-अलग मतलब दे देते हैं.
मतलबी अच्छा शब्द नहीं है. इससे आदमी की छवि खराब होती है. किसी को मतलबी कहा जाए, तो खुद उसे अच्छा नहीं लगेगा. लेकिन कहा जाए कि वह तो बड़ा फोकस्ड है, तो उसे अच्छा लगेगा, क्योंक यह पाजीटिव अर्थ देता है. यह आपके ऊपर है कि आप अपने लिये किस शब्द का प्रयोग करना चाहते हैं. अगर बास को इंचार्ज की बात लग जाती या वह जवाब नहीं दे पाता, तो अगले दिन से इंचार्ज की शिकायत दूर करने के लिये पहले उससे फोन पर दस मिनिट हालचाल लेता, उसके घर-परिवार की तबीयत के बारे में पूंछता और फिर दो मिनट काम की बात करता. दो मिनिट की बात के लिये कितना समय फालतू जाता. पर बास क्लीयर था, क्योंकि उसे पता था कि उसे फलां से सिर्फ इतनी ही बात करनी है. उसकी चिंता एक सामूहिक काम यानी कम्पनी के लिये थी, इसलिये वह फोकस्ड है और यह कोई बुरी बात नहीं. जब कोई आपसे शिकायत करता है,
तो आपको सही शब्द में उसका जवाब देना चाहिए. आरोपों को शब्दों से ही धोया जा सकता है. आपको हमेशा के लिये सोच लेना चाहिए कि आप मतलबी हैं या फोकस्ड.



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