छूलो आसमां: सही जगह पर होना जरूरी
एक मादा ऊंट और उसका बच्चा आपस में बात कर रहे हैं। बच्चा मां से पूछता है कि मां, हमारी पीठ पर कूबड़ क्यों होता है। मां कहती है कि हम रेगिस्तान में रहने वाले प्राणी है। वहां पानी कम होता है। हम अपने शरीर में ज्यादा से ज्यादा पानी जमा करके रख सकें, इसलिये कूबड़ होती है। बच्चा फिर पूंछता है- मां, हमारी टांगे इतनी लम्बी और गद्दीदार क्यों हैं। मां कहती है-बेटा, हम रेगिस्तान में रहने वाले प्राणी हैं। वहां रेत पर चलना पड़ता है। कभी वह आग जैसी गर्म होती है, तो कभी बर्फ जैसी ठण्डी। उसकी लपटें हमारे शरीर तक न पहुंचे, इसलिये हमारी टांगे लम्बी होती हैं। रेत पर आसानी से हमारे कदम जमें, इसलिये पैर गद्दीदार होते हैं। बच्चा फिर पूंछता है - मां हमारी पलकें इतनी लम्बी क्यों हैं। मां कहती है-बेटा, हम रेगिस्तान में रहने वाले प्राणी हैं। वहां अक्सर हवा में रेत उड़ती है। उस रेत से हमारी आंखों को बचाने का काम यही लम्बी पलकें करती हैं। बच्चा कहता है-अच्छा मां, पानी जमा करने के लिये हमारे पास कूबड़ है, रेत की गरमी से बचने के लिये हमारे पास लम्बी टांगे हैं और रेत से बचने के लिये हमारे पास लम्बी पलकें है। फिर मां हम रेगिस्तान में क्यों नहीं है। यहां चिड़ियाघर में क्या कर रहे हैं।
मां के पास कोई जवाब नहीं था। आपके पास प्रतिभा, लियाकत, अनुभव, ज्ञान और हुनर हो सकता है, लेकिन जब तक सही जगह पर न हों, आपके लिये इन सबका कोई इस्तेमाल नहीं। ऊंट अगर चिड़ियाघर में रहे, तो उसके लिये उन विशेषताओं का कोई महत्व नहीं, जो खासतौर पर रेगिस्तान के लिये बनी हैं। इसी तरह आपके पास कोई काम करने की विश्वस्तरीय प्रतिभा हो सकती है, लेकिन आप सही जगह पर नहीं है, कहीं ऐसी जगह हैं, जहां आपकी प्रतिभा का कोई उपयोग नहीं, तो वह प्रतिभा आपके लिये कुछ भी नहीं। वैसा ही मामला है जैसे हाकी के मैदान में निरुपयोगी पड़ा क्रिकेट का बैट।



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Comments (1 posted):
kash ki duniya mein aaisa ho jaaye ki jismein jo pratibha ho usko uski sahi jagah mil jaaye.
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