रिश्तों की मजबूती सिर्फ एक रुपये में
रिश्तों की गरमाहट बार -बार मिलने से नहीं, बल्कि मौके- बैमौके किसी के प्रति अपनी संवेदनाएं-भावनाएं जाहिर करने से बनती है। अगर आप रोज-रोज किसी के सामने जाकर बैठ जाएं , थोड़ी यहां-वहां की बातें करें, तो वह चौथे दिन से आपसे बोर होने लगेगा कि रोज -रोज चला आता है। पर अगर आप किसी से हफ्ते में एक बार भी मिलें और उसे यह बताते रहें कि आप उसकी फिक्र करते हैं, तो वह आपसे जुड़ने लगेगा। पहले तो खैर इतनी सुविधाएं नहीं थी, इसलिये लोगों को आपस में मिलना पड़ता था, पर अब तो बिना रूबरू हुए भी मजबूत रिश्ता देखा जा सकता है।
आजकल एक तरह से मोबाइल वार छिड़ा हुआ है, लैण्डलाइन फोन सेवा भी सस्ती हो चुकी है... औसतन हर टेलीफोन आपरेटर की स्कीम में 1 रुपये प्रति मिनिट शुल्क शामिल ही है। यानी आप एक रुपये में किसी के भी हाल चाल जान सकते हैं। आपको किसी को फोन करना है और सिर्फ इतना पूछना है कि भई , परसों बीमार हो गये थे, सुना है। अब कैसे हो, मुझे पता चला तो यहां दो हजार किलोमीटर दूर मैं घबरा गया था कि तुम्हे क्या हो गया। वह अपना हाल बताएगा और आप टेक केयर कहकर फोन रख देंगे। सिर्फ 1 मिनिट लगेगा और सिर्फ एक रुपये। यह काम अगर आप मार्च 1999 में करते, तो आपको एक मिनिट के लिये लगभग 38 रुपये चुकाने पड़ते। अचानक यह बात सुनकर विश्वास नहीं होता कि आज जितनी कीमत में हम जो काम करने वाले हैं , सात साल पहले वही काम हम 38 गुना ज्यादा पैसे देकर करते थे। अब फोन सस्ता हो गया है, तो इसका जमकर सदुपयोग करना चाहिए। यह नहीं कहा जा रहा कि घण्टों बात करें, फिजूल की। कोई मतलब नहीं। पैसा भी जाएगा , समय भी और सबसे बड़ी बात कि आप नेटवर्क को जाम करके बैठ जाएंगे। हो सकता है उस वक्त कोई दूसरा आदमी इमरजेंसी में किसी से बात करना चाह रहा हो और आपकी गपशप के कारण उसकी लाइन ही नहीं मिल पा रही हो।
इसीलिये बात तो मुख्तसिर सी कीजिये , पर लगातार करते रहिये। सम्पर्कों से जुड़े रहने का इस वक्त इससे सस्ता और व्यापक जरिया कोई और नहीं। अभी तो शुरुआत हुई है। आप देखियेगा कि फोन को और ज्यादा विज्ञापित करने के लिये फोन कम्पनियां इसी बात को उठाएंगी। आने वाले दिनों में आप विज्ञापन देख सकते हैं कि रिश्ते मजबूत रखिये सिर्फ एक मिनिट में। विज्ञापनों में कहने से पहले क्यों न हम इस बात पर अमल करें और एक रुपये में अपने रिश्तों को लगातार मजबूत करते रहें...



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