छूलो आसमां: अच्छी बातों की तारीफ करें
आप कभी यह अंदाजा मत लगाइये कि आपको पता है, आपकी कौन सी बात किसी को प्रेरित या प्रोत्साहित कर सकती है. कई बार ऐसा होता है कि एक सीनियर के रूप में आप किसी कर्मचारी का उत्साह बढाने के लिये कोई बात कहते हैं और कर्मचारी उसी के कारण परेशान होता दिखाई देता है. उसे लगता है कि उसके काम को समझा ही नहीं गया. इन दोनों हर जगह मोटिवेशन शब्द बड़ी चर्चा में हैं. हर आदमी चाहता है कि वह मोटिवेट हो. हर कम्पनी चाहती है कि वह अपने कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा मोटिवेट कर सके. इसके लिये वह बाहर से मैनेजमेंट गुरुओं को बुलाती है, उन्हें बड़ा पैसा देती है, पर जरूरी नहीं कि वे गुरु कर्मचारियों को मोटिवेट करने में सफल हो भी जाएं. सबसे सही मोटिवेशन वह होता है, जो मौके पर दिया जाए. एक आदमी लगातार साधारण परफार्म कर रहा है और आप उसकी तारीफ में बड़े-बड़े भाषण पढने लगें, तो वह अपनी साधारण चीज को ही असाधारण मान लेने की भूल कर देगा. और अगर कोई आदमी असाधारण काम कर रहा है और उस वक्त आपने उसकी तारीफ नहीं की, तो उसे लगेगा कि उसका असाधारण काम भी कहीं न कहीं गलत है. एक स्थिति में वह जरूरत से ज्यादा फूल जाएगा, तो दूसरी स्थिति में योग्य होने के बाद भी वह अवसादग्रस्त हो जाएगा.
कई बार हम जनरलाइज्ड तरीके से कह देते हैं कि बहुत अच्छा काम किया. इसका भी कोई मतलब नहीं होता, क्योंकि कर्मचारी समझ ही नहीं पाता कि उसके काम के किस हिस्से को अच्छा कहा जा रहा है. जैसे एक आदमी ने एक प्रोजेक्ट तैयार किया और आपने कह दिया कि अच्छा है, तो उसे संतुष्टि नहीं मिलेगी, क्योंकि उसे लगेगा कि अच्छा तो सभी कहते हैं, पर मेरे काम में खास क्या है यह भी तो कोई बताए, जिसका मैं विशेष तौर पर विकास कर सकूं.
तो ऐसे में आपको उसका प्रोजेक्ट देखने के बाद स्पेसिफिक तरीके से कहना चाहिए कि आपके प्रोजेक्ट में ये बातें बहुत अच्छी हैं. दरअसल, इन्हीं ने पूरे प्रोजेक्ट को खड़ा किया है और उसे अच्छा बना दिया है. इससे आदमी मोटिवेट हो सकता है और उन प्रशंसित बातों का विकास कर सकता है. तारीफ के मामले में जनरलाइज्ड तरीका अपनाना तारीफ के कद को भी छोटा कर देता है. इसलिये चुनी हुई जगहों पर दिल खोलकर तारीफ करें और बाकी जगहों पर मुस्कराकर.
साभार : http://chhooloaasmaan.blogspot.com/2007/04/blog-post_14.html



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