चमक फीकी पड़ने से पहले तैयार करें कार्ययोजना
उतार-चढाव भरी जिन्दगी में ऐसे कई मौके आते हैं जब हम उस कम्पनी को अलविदा कहने की जरूरत महसूस करने लगते हैं जिसमें सालों से काम कर रहे होते हैं। हम वो शहर भी छोड़ने के लिये मजबूर होते हैं जो हमारी कर्मभूमि रहा है। इसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे पति-पत्नी में से किसी का तबादला दूसरे संगठन में हो गया होता है, या फिर कम्पनी में किसी तरह की समस्या खड़ी हो गयी है जिससे आपको या आपकी संगिनी को उसे छोड़ने को मजबूर होना पड़ गया है।
फिर संयोगवश आपको नई नौकरी किसी ऐसे छोटे कस्बे में मिलती है जहां एक नई कम्पनी द्वारा प्रदत्त सुख-सुविधाएं, कार, मकान और दूसरी तमाम सहूलियतें उस स्तर की नहीं होती जो पिछले शहर की कम्पनी द्वारा उपलब्ध करवाई गई होती हैं। कभी जब पति और पत्नी दोनों नौकरी की तलाश में होते हैं, दुर्भाग्यवश दोनों को पिछली नौकरी की तरह आलीशान जगह हासिल नहीं होती। ऐसे में समझौता ही एकमात्र रास्ता बचता है और फिर आपको कम हैसियत वाली नौकरी स्वीकार करनी पड़ती है। इसका मतलब ये हुआ कि आपके कैरियर की चमक-चमक थोड़ी फीकी हो जाती है। वेतन में कमी का सीधा सम्बंध आपके आत्मविश्वास से होता है। अब आप पांचसितारा स्टाइल की हेयरकटिंग या हेयर कलर करवाने की हालत में नहीं होते। पल-पल बदलती नित-नूतन टेक्नालाजी वाली मोबाइलों पर यार-दोस्तों के साथ रंग-मिजाजी वाली बातें करने के सुख से वंचित हो जाते हैं। आपको अपनी तमाम ख्वाहिशों पर बंदिश लगानी पड़ जाती है।
ऐसे मुश्किल समय में लोगों को अपने आत्मविश्वास से लबरेज करने वाली चीजों से दिल लगाना चाहिए। जैसे प्रेरणास्पद किताबें पढना चाहिए। आमतौर पर ऐसे में लोग आपके ज्ञान पर फिदा होने से अपने को रोक नहीं सकते। इसका फायदा आपको मिलता है और देखते-देखते आपके कैरियर में एक बार फिर चमक वापस आने लगती है। आपका कैरियर ऊपर की तरफ अभिमुख हो उठता है। आप ऐसे क्षेत्र पर ध्यान दें, जिसकी खासी मांग हो, जिसमें लोगों की कमी पाई जा रही हो। अगर आप दोनों में काबिलियत रखते हैं तो आपको आगे बढने से कोई नहीं रोक सकता। फंडा यही है कि कैरियर की चमक फीकी पड़ने से पहले ही आप एक कार्ययोजना तैयार रखें।
साभार: http://chhooloaasmaan.blogspot.com/2007/04/blog-post_25.html


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