क्या वैश्वीकरण का मानवीय चेहरा संभव है ?
साथी किशन पटनायक भारत के उन गिने - चुने चिंतकों में से थे, जिन्होंने वैश्वीकरण की आंधी और चकाचौंध से अप्रभावित रहकर इसके पीछे की ताकतों और इसके खतरों को शुरु से पहचान लिया था
यह ई-बुक श्री सुनील , राष्ट्रीय महामंत्री , समाजवादी जनपरिषद द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘अर्थ’ और ‘अमिट’ द्वारा आयोजित किशन पटनायक स्मृति व्याख्यान , १७ अक्टूबर २००६ का प्रस्तुतीकरण है.
इसे आप http://cafehindi.com/e-books/globalisation.pdf से डाउनलोड कर सकते हैंसाभार : http://samatavadi.wordpress.com/2007/01/24/globalisation-human-face/
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