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पैसे का पावर या पावर का पैसा

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नवधनाढ़य जो नए नए पैसे आने पर इतराते हुए घूमते हैं उनके लिए एक कहावत याद आती है पैसे का पावर....लेकिन यदि आप इसमें शामिल नहीं हैं तो आप पावर का पैसा बना सकते हैं। सरकार ने अगले 30 साल के भीतर देश के कौने कौने में 24 घंटे बिजली उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य तय किया है। इस लक्ष्‍य को पाने के लिए भारी भरकम निवेश करना होगा जिसका बड़ा लाभ ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर, एबीबी और थर्मेक्‍स जैसी कंपनियों को होगा। पावर इक्विपमेंट, पावर ट्रांसमिशन, पावर उत्‍पादन से जुड़ी कंपनियों का भविष्‍य लंबे समय तक उज्‍जवल रहेगा।
शेयर बाजार में भले ही उतार चढ़ाव होता रहे लेकिन इन कंपनियों की आय और शेयरों की कीमत हमेशा बढ़ती रहेगी। यदि हम पिछले छह महीनों का ही हिसाब किताब देखें तो एबीबी के शेयरों के दाम 31 फीसदी, अरेवा टीएंडडी के 65 फीसदी और ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर के 69 फीसदी बढ़े। शेयर विश्‍लेषकों पर भरोसा करें तो एबीबी, क्रॉम्‍पटन ग्रीव्‍ज और भेल को बिजली क्षेत्र की मांग को देखते हुए तगड़े निवेश से अपना भावी विस्‍तार करना होगा। भारत में जरुरी बिजली उत्‍पादन क्षमता खड़ी करने और वितरण के लिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि निवेश करनी होगी। यह इस बात का संकेत है कि बिजली उपकरण बनाने वाली कंपनियों जैसे कि एबीबी, सीमेंस, प्राज और भेल के पास बड़े ऑर्डर हैं। सरकार ने ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना 2007/2012 के दौरान 78577 मेगावॉट रिकॉर्ड बिजली क्षमता खड़ी करने की योजना बनाई है। इसका मतलब होगा कि बिजली उपकरणों की मांग खूब होगी और मौजूदा पूंजीगत गर्मी से अन्‍य इंजीनियरिंग सामानों की भी मांग निकलेगी। एबीबी की बात की जाए तो उसके पास 31 मार्च 2007 को 5623 करोड़ रुपए के ऑर्डर थे, जबकि थर्मेक्‍स को अप्रैल से दिसंबर 06 तक 3024 करोड़ रूपए के ऑर्डर मिले। सभी कंपनियों के पास कम से कम उनकी एक साल की बिक्री के बराबर ऑर्डर हैं। केंद्र सरकार वर्ष 2012 तक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर 320 अरब डॉलर यानी 13.12 लाख करोड़ रूपए खर्च करना चाहती है जिसमें एक बड़ा हिस्‍सा बिजली क्षेत्र के नाम है। इंफ्रास्‍ट्रकचर बूम की बात करें तो सरकार ने वर्ष 2008 से 2012 के दौरान बिजली क्षेत्र के लिए 5516 अरब रुपए यानी 43.57 फीसदी राशि खर्च करने का लक्ष्‍य रखा है। सड़क पर यह राशि 2474 अरब रुपए यानी 19.54 फीसदी, रेलवे पर 1495 अरब रुपए, बंदरगाह और हवाई अड्डों पर 958 अरब रुपए, पानी आपूर्ति एवं पाइपलाइंस पर 1186 अरब रुपए और शहरी बुनियादी सुविधाओं पर 1031 अरब रुपए खर्च किए जाएंगे। पावर ट्रांसमिशन में ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर और कल्‍पतरु की सालाना विकास दर 25/30 फीसदी रहने की उम्‍मीद है। पावर उपकरणों की जिन कंपनियों में आप निवेश कर सकते हैं, वे हैं: एबीबी, सीमेंस, थर्मेक्‍स, कल्‍पतरु, ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर, क्राम्‍पटन गीव्‍ज, भेल, क्‍युमिंस इंडिया, प्राज, किर्लोस्‍कर ब्रदर्स।

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