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ग्‍वार हो सकता है पानी पानी

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ग्‍वार का देश में जमा भारी भरकम स्‍टॉक और सामान्‍य मानसून की रिपोर्ट इसे जल्‍दी ही पानी पानी कर सकती है। केरल में मानसून 24 मई को आने की घोषणा से यह स्‍पष्‍ट है कि मानसून राजस्‍थान में 25 जून तक पहुंच जाएगा लेकिन मानसून के एक सप्‍ताह पहले पहुंचने की जो बात कही जा रही है उसके बाद यह लगता है कि यह राजस्‍थान में 18/20 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है। हालांकि, राजस्‍थान में ग्‍वार की बोआई जुलाई महीने के पहले सप्‍ताह में शुरू होती है इसलिए इसे जुलाई में बारिश की जरुरत होगी। लेकिन जून में होने वाली बारिश हरियाणा, पंजाब और राजस्‍थान के श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलों में बोई जाने वाली ग्‍वारी के लिए फायदेमंद रहेगी। यदि इन जगहों पर मानसून पूर्व की भी बारिश होती है तो ग्‍वारी की उपज बढ़ाने में वरदान साबित होगी। हालांकि, ये इलाके नहरी क्षेत्र के हैं इसलिए यहां पानी की कमी नहीं रहती। लेकिन हरियाणा के किसान इस साल ग्‍वार के बजाय कपास की बोआई को अधिक महत्‍व दे रहे हैं और कपास के बेहतर भावों ने इन्‍हें ग्‍वार से मोड़ा है। वैसे भी ग्‍वार की बोआई यहां खेतों को प्राकृतिक रुप से बेहतर बनाने के लिए की जाती है।

ग्‍वार की फसल के लिए राजस्‍थान में जुलाई में बारिश होनी जरुरी है इसके बाद 15/20 दिन बाद यानी अगस्‍त मध्‍य में बारिश की जरुरत होगी। इसके बाद यदि सितंबर में बारिश होती है तो यह ग्‍वार के लिए सोने में सुहागा साबित होगी। हालांकि, 15 जुलाई के बाद ही पता चलेगा कि राजस्‍थान में ग्‍वार की बोआई कितनी हुई लेकिन इसके बाद भी कई जगहों पर बोआई का काम होता रहता है इसलिए पूरी तस्‍वीर 31 जुलाई के बाद ही सामने आ पाएगी। मौसम विभाग की जो भविष्‍यवाणी आई है उसके मुताबिक देश में इस साल मानसून सामान्‍य रहेगा जिससे यह लग रहा है कि ग्‍वार की फसल अच्‍छी होगी। सामान्‍य मानसून होने की दशा में ग्‍वार राजस्‍थान के धोरों पर भी आसानी से पैदा हो जाती है, जबकि कम मानसून की दशा में इसकी धोरों पर पैदावार नहीं हो पाती। राजस्‍थान के किसानों का कहना है कि वे ग्‍वार को छोड़कर अन्‍य फसलों मसलन बाजरा और मोठ की ओर नहीं मुड़ेंगे क्‍योंकि ग्‍वार काला सोना है और इसे दूसरी उपजों की तुलना में कभी भी बेचा जा सकता है।

अब बात करते हैं फसल की। यदि राजस्‍थान, हरियाणा और गुजरात में पिछले साल की तरह का भी मानसून रहता है और उपज का क्षेत्रफल ज्‍यादा घटता नहीं है तो यह पैदावार 75 लाख बोरी रह सकती है। जबकि अभी तक देश में ग्‍वार का स्‍टॉक 50/55 लाख बोरी है। अगली फसल आने तक इसमें से अधिक से अधिक 15 लाख बोरी की खपत होगी। इस खपत को घटाने के बाद 35/40 लाख बोरी का स्‍टॉक रहेगा। इस तरह अगली उपज 75 लाख बोरी और स्‍टॉक 35/40 लाख बोरी मान लें तो कुल उपलब्‍धता एक करोड़ दस लाख से एक करोड़ पंद्रह लाख बोरी रहेगी जबकि हमारी कुल मांग 80 लाख बोरी से अधिक नहीं है। इस तरह ग्‍वार की उपलब्‍धता 30/35 लाख बोरी अधिक रहेगी जो इसके दामों को पानी पानी करने के लिए पर्याप्‍त है।

बेहतर मानसून और उपज की भावी स्थिति को देखते हुए ही इन दिनों ग्‍वार वायदा में गिरावट चल रही हैं हालांकि सटोरिएं बीच बीच में मानसून की स्थिति और कुछ जगह उपज कम होने और अधिक होने की बात कर ग्‍वार को सौ रुपए क्विंटल की घटबढ़ में घूमाते रहेंगे। चालू सीजन में ग्‍वार सीड ऊपर में 2160/2170 रुपए ऑल पैड और नीचे में 1750 रुपए ऑल पैड प्रति क्विंटल बिकी है, जबकि वायदा में यह ऊपर में 2250/2275 रुपए और नीचे में 1733 रुपए प्रति क्विंटल बिका है। किसान और कारोबारी मानते हैं कि अगले साल यदि ग्‍वार सीड की उपलब्‍धता एक करोड़ दस लाख बोरी या इससे ज्‍यादा रहती है तो नए सीजन में इसके भाव हाजिर में 1450/1500 रुपए क्विंटल खुलने चाहिए।

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