जीरे का छौंक पड़ेगा महंगा
कृषि कमोडिटी में यह साल जीरे के नाम रहेगा। पिछले तीन साल से जीरे के भाव ठीक ठाक न रहने से किसानों ने गुजरात और राजस्थान में इसकी तकरीबन 40/50 फीसदी ही बोआई की थी लेकिन बाद में बेमौसमी बारिश से यह भी बुरी तरह धुला और फसल 15 लाख बोरी से कम रह गई। किसानों ने इस साल जीरे के बजाय ईसबगोल, सौंफ, सरसों, चने और गेहूं जैसी फसलों को ज्यादा महत्व दिया। घटी फसल के साथ बढ़ते निर्यात से यह साल जीरे का होगा। हालांकि, इस समय देश की सबसे बड़ी मसाला मंडी ऊंझा में एनसीडीईएक्स क्वॉलिटी जीरा 12200/12300 रुपए और एवरेज क्वॉलिटी जीरा 11000/11200 रुपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है जो पिछले दिनों की तुलना में काफी नरम है। लेकिन यह गिरावट रुपए का अमरीकी डॉलर की तुलना में पिछले नौ साल की तुलना में रिकॉर्ड मजबूत होने से आई है। रुपए के मजबूत होने से निर्यात पर विपरीत असर पड़ेगा जिससे जीरे में रिकॉर्ड तेजी के बाद नरमी देखी जा रही है लेकिन कुल मिलाकर यह साल जीरे की तेजी के नाम रहेगा, इसमें दो राय नहीं।
देश में इस साल जीरे का ओपनिंग स्टॉक तकरीबन आठ लाख बोरी रहा और कुल उपलब्धता 23 लाख बोरी के आसपास है। जीरे की उपलब्धता की तुलना में हमारी घरेलू खपत तकरीबन 15/18 लाख बोरी रहती है। जबकि निर्यात के साथ इसकी कुल मांग 22/24 लाख बोरी रहती है। हालांकि, जीरे की घरेलू खपत इसके भाव पर निर्भर करती है। यदि जीरे के भाव काफी ऊंचे रहते हैं तो इसकी घरेलू खपत में खासी गिरावट आ जाती है। वर्ष 2006/07 में देश में जीरे का उत्पादन 21 लाख बोरी था और ओपनिंग स्टॉक तीन से चार लाख बोरी। यानी कुल उपलब्धता 24/25 लाख बोरी। वर्ष 2005/06 में लगभग 17.50 लाख बोरी जीरे का उत्पादन हुआ था। जीरे की फसल हर साल चाहे जितनी हो लेकिन यह जानना जरुरी है कि इसका तीन से चार लाख बोरी डेड स्टॉक देश में रहता है। वर्ष 2001/02 में सबसे अधिक 41.2 लाख बोरी जीरे का उत्पादन हुआ था।
जीरे का उत्पादन करने वाले अन्य देश हैं- उत्तरी अफ्रीका, ईरान, इंडोनेशिया, चीन इजिप्त, तुर्की व सीरिया। भारतीय जीरे के चार देश तुर्की, सीरिया, ईरान और इजिप्त मुख्य प्रतिस्पर्धी हैं। लेकिन इन चार देशों में इस समय जीरे का स्टॉक नहीं है। इन देशों में नए जीरे की आवक जून महीने में होती है। इस साल तुर्की में 5300 टन, सीरिया में 15 हजार टन, इजिप्त में पांच हजार टन और ईरान में सात हजार टन जीरे का उत्पादन हुआ। चीन में पिछले तीन चार साल से जीरे का उत्पादन होने की बात सुनी जा रही है लेकिन वहां की फसल और उत्पादन के ठोस आंकडें उपलब्ध नहीं हैं। तुर्की, सीरिया, ईरान और इजिप्त में जीरे का कैरी ओवर स्टॉक न होने और जून तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय जीरे का बोलबाला रहने से इसकी कीमतें तेज रहने की संभावना है। लेकिन जरुरी है कि भारतीय रुपया अमरीकी डॉलर की तुलना में नरम पड़े। भारत से जीरे का निर्यात इसके प्राकृतिक स्वरुप के साथ पावडर बनाकर व तेल के रुप में भी किया जाता है। भारतीय जीरे के मुख्य आयातकों में अमरीका, यूरोपीय संघ, पश्चिमी एशिया व दक्षिण पूर्वी एशिया के देश शामिल हैं।
भारत से बीते वित्त वर्ष में जीरे का निर्यात पहली बार 25 हजार टन पार करने के बात सामने आई है। इससे पहले वर्ष 2000/01 में सबसे अधिक 18891 टन जीरे का निर्यात किया गया था, जिसका मूल्य 178.35 करोड़ रूपए था। देश से जीरे का शीपमेंट सबसे पहले वर्ष 1960/61 में प्रारंभ हुआ, जब 20.10 लाख रुपए मूल्य का 1201 टन जीरा निर्यात किया गया था। तब से लेकर गत वित्त वर्ष तक जीरे का निर्यात मात्र आठ बार दस हजार टन से ऊपर निकला है। भारत में जीरा मुख्यत: राजस्थान व गुजरात में पैदा होता है। देश के कुल जीरा उत्पादन में इन दोनों राज्यों का हिस्सा 90 फीसदी है। अकेले राजस्थान में देश के कुल उत्पादन का 50/55 फीसदी जीरा पैदा होता है। भारत जीरे का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भी है। इसके कारण देश में कुल उत्पादित जीरे में से लगभग 90 फीसदी की खपत घरेलू बाजार में ही हो जाती है।



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