पीले हाथ नहीं होंगे हल्दी से
घरेलू और निर्यात मांग के अभाव में हल्दी के दाम हाजिर बाजार में जहां घटते जा रहे हैं वहीं वायदा में यह अभी भी मजबूत बनी हुई है। इस विपरीत रुझान से कारोबारियों को समझ ही नहीं आ रहा है कि हल्दी में अब क्या होगा। फंडामेंटल्स के आधार पर बात की जाए तो हल्दी में अब तेजी के कोई आसार नहीं बनते क्योंकि 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के बाद घरेलू बाजार में मांग लगभग बंद हो जाती है और बाजारों में आने वाली हल्दी केवल स्टॉकिस्टों के गोदामों में जाती है। साथ ही रुपया अमरीकी डॉलर की तुलना में जिस तरह मजबूत हुआ है, उससे इसका निर्यात कठिन हो गया है। देश में इस साल हल्दी का उत्पादन तकरीबन 52 लाख बोरी प्रति बोरी 75 किलो हुआ है, जो पिछले साल 48 लाख बोरी था। साथ ही आठ लाख बोरी के ओपनिंग स्टॉक को शामिल करने पर यह कुल उपलब्धता 60 लाख बोरी थी। अब यदि हल्दी के नए सीजन से पहले दिसंबर तक की खपत को गिन भी लिया जाए तो अगले साल हल्दी का कैरी फारवर्ड स्टॉक 10/15 लाख बोरी रहने का मोटा अनुमान सामने आता है।
हल्दी में न तो कहीं से कोई आयातक सामने आ रहे हैं और न ही घरेलू खपतकर्ता। इस वजह से हल्दी अब स्टॉक में जा रही है। निजामाबाद में इस समय दो से सवा दो लाख बोरी हल्दी का स्टॉक हो चुका है, जबकि इसके आसपास के इलाकों में हल्दी का स्टॉक 75 हजार बोरी बताया जा रहा है। महाराष्ट्र की सबसे बड़ी हल्दी मंडी सांगली में एक लाख बोरी हल्दी का स्टॉक हो गया है। इसमें अभी 50/60 हजार बोरी और जुड़ने की संभावना है। ईरोड में साढ़े सात लाख बोरी हल्दी का स्टॉक है। इसी तरह दुग्गीराला, वरंगल में भी हल्दी गोदामों की शोभा बढ़ा रही है। गुंटूर, निजामाबाद, कडप्पा, ईरोड और वरंगल में हल्दी का स्टॉक करने के लिए और गोदामों की मांग की जा रही है क्योंकि मौजूदा गोदाम पूरी तरह भर चुके हैं। अभी भी यहां काफी हल्दी बाहर खुले में पड़ी हुई है।
विदेश व्यापार की बात करें तो जनवरी में मार्च डिलीवरी के कुछ सौदे हुए थे जो 2250 रुपए प्रति क्विंटल एफओबी मुंबई हुए थे। उस समय अमरीकी डॉलर आज की तुलना में काफी सुखद स्थिति में था। लेकिन अब डॉलर के कमजोर पड़ने से हल्दी के नए निर्यात सौदे नहीं हो रहे हैं। सांगली में निजामाबाद क्वॉलिटी हल्दी का हाजिर भाव 2000/2350 रुपए, देसी कडप्पा 2150/2450 रुपए, राजापुरी बेस्ट 2400/2800 रुपए प्रति क्विंटल बोली जा रही है। जबकि दुग्गीराला में हल्दी 1650/1900 रुपए, कडप्पा में 1700/1950 रुपए, ईरोड में 2075/2125 रुपए, सेलम में 2700/3100 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है।
हल्दी के फंडामेंटल्स को देखते हुए हल्दी हाजिर में 120/175 रुपए क्विंटल की गिरावट आ सकती है। हल्दी में तेजी केवल तभी आ सकती है, जब स्टॉक में जमा हो रही हल्दी में से 50/60 फीसदी हल्दी की खपत हो जाए। हाजिर में हल्दी में गिरावट बढ़ने का एक अन्य कारण म्यांमार, चीन और वियतनाम जैसे देशों द्धारा हल्दी की उपज बढ़ाना भी है। अधिकतर विश्लेषक मानते हैं कि हल्दी हाजिर में 1750/1800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास स्थिर हो सकती है, जबकि जून वायदा 2000/2100 रुपए क्विंटल के बीच घूमने के आसार हैं।
देश में मानसून आने की तैयारी है और हल्दी में 15 जुलाई के बाद यह पता चल जाएगा कि इसकी बोआई कैसी होती है। यदि हल्दी की बोआई बढ़ी तो इसके दामों में गिरावट बढ़ सकती है। नए सीजन में हल्दी की बोआई बढ़ने के आसार ही अधिक है क्योंकि इस साल देश में गन्ने का उत्पादन बढ़ने और किसानों को इसका फायदा न होने से वे हल्दी की बोआई की ओर मुड़ेंगे। इस साल हल्दी के सीजन की शुरूआत में किसानों को गन्ने से बेहतर दाम हल्दी में मिले हैं। लेकिन उपज क्षेत्र बढ़ाने की भेड़ चाल किसानों और कारोबारियों के लिए घातक हो सकती है।
साभार : http://moltol.blogspot.com/2007/05/blog-post_11.html



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