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रुपए ने बिगाड़ा जायका काली मिर्च का

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उत्‍पादन में कमी के कारण काफी तेजी देख चुकी काली मिर्च अब रुपए में मजबूती से लाचार दिख रही है। माना जा रहा है कि जब तक रुपया कमजोर नहीं होता तब तक मजबूत फंडामेंटल्‍स के बावजूद काली मिर्च में ज्‍यादा बढ़त नहीं होगी।

इस साल काली मिर्च का वैश्विक उत्‍पादन पिछले साल के 2.33 लाख टन के मुकाबले घटकर 2.18 लाख टन के आसपास रहने की उम्‍मीद है। जिससे भारत व वियतनाम जैसे काली मिर्च के मुख्‍य उत्‍पादक देश रुक रुक कर बिकवाली कर रहे हैं। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में फिलहाल इन्‍हीं दो देशों में काली मिर्च उपलब्‍ध है। मलेशिया में पिछले दो तीन दिन से नई फसल की आवक शुरू हुई है लेकिन इसके अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में पहुंचने में अभी काफी वक्‍त है। वैसे भी मलेशिया में काली मिर्च का बहुत ज्‍यादा उत्‍पादन नहीं होता है। ब्राजील भी इस समय खास सक्रिय नहीं है।

पहले हम बात करें वियतनाम की। वियतनाम ने काली मिर्च के दामों के और भड़कने की उम्‍मीद में बेहतर क्‍वॉलिटी मानी जाने वाली एस्‍टा ग्रेड की काली मिर्च बेचना बंद कर दिया है। हालांकि, वह हल्‍के ग्रेड की काली मिर्च बेच रहा है जिसके ज्‍यादा लेवाल नहीं हैं। वियतनाम ने हाल ही काली मिर्च के भाव 3900 डॉलर से बढ़ाकर 4050 डॉलर प्रति टन कर दिए हैं। वियतनाम में तकरीबन 90 फीसदी फसल खेतों से निकाली जा चुकी है, बाकी फसल इस महीने के अंत तक निकाल ली जाएगी।

वियतनाम के व्‍यापार मंत्रालय का कहना है कि काली मिर्च की घरेलू और निर्यात कीमतों में इजाफा हुआ है। इस सप्‍ताह वियतनाम में 3740/3780 डॉलर फ्री ऑन बोर्ड यानी एफओबी प्रति टन के भाव पर काली मिर्च के निर्यात सौदे तय किए। जबकि मार्च और अप्रैल के पहले सप्‍ताह में काली मिर्च का निर्यात भाव 2550 डॉलर और 2780 डॉलर एफओबी प्रति टन था। वियतनाम में चालू माह के आखिर तक काली मिर्च के दाम 500 डॉलर प्रति टन तक बढ़ सकते हैं। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार की जोरदार मांग को देखते हुए वियतनाम के व्‍यापार मंत्रालय ने हालांकि मई के दामों की कोई भविष्‍यवाणी नहीं की है।

गौरतलब है कि वियतनाम समूची दुनिया में पैदा होने वाली काली मिर्च का 60 फीसदी उत्‍पादन करता है। वियतनाम पीपर एसोसिएशन ने इस साल जनवरी में कहा था कि काली मिर्च का उत्‍पादन कम होने से उसके निर्यात में इस साल दस फीसदी कमी आ सकती है। वियतनाम ने पिछले साल 1.18 लाख टन काली मिर्च का रिकॉर्ड निर्यात किया था। इस बीच, जनवरी से अप्रैल के दौरान वियतनाम के काली मिर्च निर्यात में 42.5 फीसदी की पिछली साल की समान अवधि की तुलना में गिरावट देखी गई है।

भारत का जहां तक सवाल है तो यहां के कारोबारी काली मिर्च बेचना चाहते हैं लेकिन अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। भारतीय निर्यातक 3950 डॉलर प्रति टन के भाव मांग रहे हैं, जबकि ग्राहक 3900 डॉलर प्रति टन के भाव बोल रहे हैं। रुपए में मजबूती के कारण भारतीय निर्यातकों के लिए निचले भावों में काली मिर्च बेचना मुनासिब नहीं है। पिछले हफ्ते भारतीय निर्यातकों ने यूरोप, अमरीका और मध्‍य पूर्व देशों के साथ 500/600 टन काली मिर्च के सौदे किए थे, लेकिन रुपए में बढ़त का रुख जारी रहने से उसके बाद कोई सौदे नहीं हो पाए। यद्यपि अमरीकी आयातक जुलाई से सितंबर के लिए काली मिर्च के सौदे 4050 डॉलर प्रति टन पर करने को तैयार है। लेकिन वायदा कारोबार में हो रहे तगड़े उतार चढ़ाव की वजह से भारतीय निर्यातक इन सौदों को करने की स्थिति में नहीं है।

काली मिर्च के उत्‍पादन में कमी और वियतनाम व भारत के कारोबारियों द्धारा अपनाई जाने वाले रुक रुक कर बिकवाली करने की नीति के कारण काली मिर्च में बुनियादी तौर पर तेजी दिख रही है और सभी मान रहे हैं कि इसके भाव हाल के 14800 रुपए के स्‍तर से बढ़कर 17000 रुपए प्रति क्विंटल तक चले जाएंगे। लेकिन जब तक रुपया मजबूत बना रहेगा, इसकी संभावना कम ही दिख रही है।

http://moltol.blogspot.com/2007/05/blog-post_10.html

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