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क्या यह विज्ञापन दहेज देने के लिये प्रेरित नहीं करता.

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आपकी बिटिया के होने वाले पति के लिये भरोसेमंद हमसफ़र कौन है? उसकी पत्नी? जी नहीं. आज के दैनिक भास्कर में छपे इस विज्ञापन को देखिये. इस विज्ञापन की माने तो जमाईराजा के लिये भरोसेमंद हमसफ़्रर एक मोटरसाईकिल है.

विज्ञापन बनाने वाली एजेन्सियों को समझदारी से काम लेना चाहिये. इस तरह के विज्ञापन नहीं होने चाहिये.

Comments (2 posted):

सुरेश चिपलूनकर on 18 April, 2007 11:47:53
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श्रुति जी ने बिलकुल सही कहा है, इस विज्ञापन एजेंसी और भास्कर को निषेध पत्र भेजना चाहिये.. इसी से मिलता-जुलता एक और विज्ञापन आता है जिसमें बेटी इसलिये रोती है कि उसे दहेज में "हॉलमार्क" का सोना नहीं दिया गया...क्या मजाक है...यदि सरकार "हॉलमार्क" को लोकप्रिय ही बनाना चाहती है तो कम से कम विज्ञापन तो भद्दे ना हों...
anupma on 26 April, 2007 07:27:11
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sach kha, jagrook reh ker aur samay per awaaj utha ker hum buraio ko badne walo ko rokne mein madad ker sakte haen.

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