अभाव और सन्नाटे में बच्चे जल्दी बड़े हो जाते हैं
मज़दूरों की
अंधेरी गंदी बस्ती में
अब कोई कुछ नहीं बोलता
एक अजीब सन्नाटे ने
कफ़न की तरह
ढांप लिया है पूरी बस्ती को
जहां हर चीज़ भयावह लगती है
क्योंकि
कफ़न आदमी के अन्दर
पैदा करता है भय!
जितना सफेद होगा कफ़न
उतना ज्यादा डरायेगा।
जाहिर है
हर सफेद चीज़ पर
नहीं किया जा सकता भरोसा
बस्ती वाले भी नहीं करते
उन्होंने कर दिया है बेनक़ाब
सफेदपोशों को
और तब से
मुंह फेर लिया है
इंक़लाबी नारों ने।
पहले ख़ामोश हुआ था
कारखाने का सायरन
फिर उम्मीद जगाते नारे
अब तो बिल्कुल सन्नाटा है--
कुत्ते भी नहीं भौंकते
और बच्चे?
वे तो अब किसी बात के लिए
जिद तक नहीं करते।
अभाव और सन्नाटे में
बच्चे जल्दी बड़े हो जाते हैं।
साभार: http://satyendra2007.blogspot.com/
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