चलो आगे चलें..
अपने दिल में ही तलाशो,
तह में सच को पाओगे.
खुद की नज़रों से भला,
तुम कब तलक बच पाओगे.
तख़्त फांसी से उतर के,
किस तरह जी पाओगे.
डूब कर निज ग्लानि में,
तुम खुद -ब-खुद मर जाओगे.
इस जहां मे अब नहीं, कोई खुदा रह पायेगा
वहशती चालों को तेरी, अब नहीं सह पायेगा.
बांध ले सामां तू अपना, गर खुदा से वास्ता
शातिराना बात अपनी कब तलक कह पायेगा.
हो खुदा ,भगवान हो या, एक ही तो बात है
चाहे घर कोई हो तोड़ा, सिर्फ़ उसकी मात है
तोड़ कर के एक घर को, दूसरा बनवाओगे
मानता हूँ मै निहायत, बेतुका जज्बात है.साभार : http://udantashtari.blogspot.com/2006/10/blog-post_13.html
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