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कविता-शायरी

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इतनी निर्दयी कैसे हो गयी तू मां?

मां,तूने मुझे कभी प्यार नहीं किया.न रखा कभी सिर पर हाथ.दो पैसे देना तो दूर.जब मैं बिजली घर बस अड्डे परया राजामंडी रेलेवे स्टेशन परअखबार बेच
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क्षमा करना माँ

क्षमा करना माँमैंने भी तुम्हारी इच्छाओं,अपेक्षाओं को नज़र अन्दाज कर दिया माँक्षमा करना माँ ,मैं तुम जैसी न बन सकी,मैं प्रश्न करती रहीऔरों से नहीं ...
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स्वर्ग - नरक

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भारतीय संस्कृति के अनुसार मृत्यु के बाद हमे अपने कर्मो के हिसाब से स्वर्ग या नरक मे जगह मिलती है.मैने इस समय वहां के हालात ...
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बुढापा देख कर रोया...

एक मित्र ने विनोदवश प्रश्न उठाया कि क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ है कि किसी कविता की सिर्फ भूमिका ही पढ़ी गई और लोगों ...
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चलो आगे चलें..

अपने दिल में ही तलाशो, तह में सच को पाओगे.खुद की नज़रों से भला,तुम कब तलक बच पाओगे.तख़्त फांसी से उतर के,किस तरह जी पाओगे.डूब ...
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देश लगे शमशान

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कितने घर बर्बाद हुये हैंकितने नर-संहार हुये हैंतेरे घृणित कृत्य के आगेदेव सभी लाचार हुये हैं.मानवता का वह हत्याराक्यूँ तेरी है आँख का ताराउसको जीवन-दान ...
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लागिन