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साहित्य

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तुम मेरे होकर रहो कहीं…

स्व.रमानाथ अवस्थीजी उन गीतकारों में से थे जिनको सुनते समय लगता था मानों समय ठहर गया है। उन्हीं की स्मृति में यह लेख लिखकर मैं
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दोपहर में गाँव

भीषण तापमान के दिनों में मुझे अक्सर 'दूसरा साप्तक' की कविता घेर लेती है –घर की खपरैलों के नीचे चिड़िया भी दो-चार चोंच खोलउड़ती छिपती ...
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श्रीलाल शुक्ल-विरल सहजता के मालिक

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कल शनिवार को जब दोपहर आफिस से घर आया तो डाक से आया किताब का एक पैकेट मेरा इंतजार कर रहा था। सोचा शायद देबाशीष ...
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यह कवि अपराजेय निराला

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निराला ने बीस साल की उमर होते-होते अपनी पत्नी, भाई और तमाम परिवारी जनों को खो दिया था। पत्नी के जीवित रहते उन्होंने उनकी कद्र ...
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लागिन