होंडासा वांगाऊ जैंगारा हाजाचालं बाचमुलू के बवाल
जी मैं पहले ही साफ किये देता हूं। मैं राष्ट्रपति पद के लिए कैंडीडेट एकदम नहीं हूं। इस बयान के बाद मैं समझता हूं कि प्रणव मुखर्जी, शिवराज पाटिल, अर्जुन सिंह, कर्ण सिंह, लक्ष्मीमल्ल सिंघवी, भैंरोसिंह शेखावतजी और जो भी मुझे अपना प्रतिस्पर्धी समझ रहे हों, उन सबसे मेरी प्रतिस्पर्धा खत्म हो गयी है। और ये मेरी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा सकते हैं।
यह सोचकर ही मेरा मन कांप हो उठता है कि मैं राष्ट्रपति हो गया हूं। हाय हाय कैसे तो कटेगी। अभी कुछ दिन पहले टीवी पर देखा, अफ्रीका के किसी गणराज्य के राष्ट्रपति को हमारे राष्ट्रपति रिसीव कर रहे थे, राष्ट्रपति भवन में। सिलसिला कुछ यूं चलता था कि अफ्रीकन राष्ट्रपति अपनी भाषा में कुछ कहते थे, फिर उनका दुभाषिया उसे अंग्रेजी में कुछ का कुछ बताता था। फिर उसे हिंदी में हम कुछ का कुछ समझते थे। हमारे राष्ट्रपति हर बार मुस्कुराते प्रतीत होते थे।
वार्तालाप यूं हुआ।
अफ्रीकन राष्ट्रपति-होंवागा, होंडासा वांगाऊ जैंगारा होटंकालु हाजाचालं बाचमकाम बाजावटच हमामाम।
दुभाषिया के कहे का हिंदी आशय-हमारे राष्ट्रपति कह रहे हैं कि भारत महान राष्ट्र है, हम भी महान राष्ट्र हैं। दोनों ही महान राष्ट्र हैं। इस बात को समझने में ही महानता है।
अफ्रीकन राष्ट्रपति-गंदाडामन हलामाचा तताबोलड सआबवोत लाजौलाड हौसाजाप, वाहफ ,वफाक वफाक।
दुभाषिया के कहे का हिंदी आशय-हम सब महान हैं. तो महानों की तरह की बातें करनी चाहिए। मैं राष्ट्रपति के महान टेस्ट की तारीफ करता हूं। उन्होने अपने यहां मुगल गार्डन में तरह-तरह के फूल लगा रखे हैं।
अब बताइए साहब, एक अफ्रीकन राष्ट्रपति तो आते नहीं हैं, वहां। रोज कोई न कोई आता ही है। सबकी इस तरह से सुनते रहे , तो मर जायेंगे। रात में भी कान में होंगाडा, जांबाला, खोंलाबू सुनायी देगा। इतनी महानता तो हम न झेल पायेंगे। राष्ट्र भले ही महान हो गया हो, हम तो क्षुद्र ही रह गये है ना। बल्कि हम तो अकसर ही पूछते हैं कि भई जो राष्ट्र महान हुआ है, वो है कहां। दिखायी नहीं पड़ता। हमें तो अपने यहां बिजली जाती हुई दिखायी पड़ती है। वैसे सुना है, बिजली तो राष्ट्रपति भवन में भी जाती है। और पानी राष्ट्रपति भवन में भी रेगुलरली नहीं आता है। तब ठीक है, इसका मतलब यह कि बिजली -पानी के मामले में राष्ट्रपति भवन राष्ट्र से जुड़ा हुआ है, एकैदम से मामला मुगल गार्डनात्मक नहीं हो लिया है।
साहब, मैं महान देश का अत्यधिक क्षुद्र नागरिक हूं, खालिस भारतीय आदतें हैं मेरी। अपने घर से बीस फुट आगे की जगह को पार्क या पार्किंग या फिर दोनों के नाम पर जब तक न घेर लूं, मुझे चैन नहीं पड़ता। अब जरा सोचिये, राष्ट्रपति भवन के बाहर मैंने बीस-बीस फुट जगह घेर ली, और पीडब्लूडी वालों ने मुझे नोटिस दिया और मैंने सरकार को गिराने की धमकी दे दी, तो संवैधानिक संकट हो जायेगा ना। नहीं, हम तो खुद के लिए ही संकट हैं, संवैधानिक संकट की वजह नहीं बनना चाहते।
और फिर मैं तो और तरह की बातें सोचकर डर जाता हूं, सुना है राष्ट्रपति बनने के बाद कोई दिक्कत नहीं होती। बिजली का बिल एकदम ठीक आता है। फोन के बिल वाले भी हर बार पांच-सात सौ रुपये एक्स्ट्रा लगाकर नहीं भेजते। हाय हम पूरे दिन करेंगे क्या। अभी तो एक दिन बिजली का बिल सही कराने जाते हैं। लोकल दफ्तर वाला ऊपर भेज देता है। ऊपर वाला और ऊपर वाला भेज देता है। एक हफ्ता इसी में कट लेता है। फोन के बिल का भी यही हिसाब है, एक बंदा कहता है कि उस दफ्तर चले जाओ। वहां बताया जाता है कि नहीं जी बिल तो आपका पचास हजार का है, पर आप सिर्फ पच्चीस हजार पर सैटल कर लो। दस हजार रुपये में सैटलमेंट के लिए तो आपको ओखला जाना पंडेगा। जी एकाध हफ्ता तो इसमें कट लेता है। इतने बवाल रहते हैं कि लाइफ कटी जा रही है। इन सारे बवाल न रहें, तो जियेंगे कैसे।
खैर साहब, सबसे महत्वपूर्ण मसला यह है कि वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ जायेगा। पत्नी का कहना है जब तुम बिजी रहते हो, तो तुम झगड़ा नहीं करते। चाय-पानी-खाना तुम्हे सब ठीक लगता है। जिस दिन तुम खाली रहते हो,उस दिन बेहतर चाय बनाने की तकनीक सिखाने लगते हो।
बात सही है, कई विवाह इसीलिए चल रहे हैं कि दोनों के पास झगडने का टाइम नहीं है।
मैंने भी नोट किया है, जब पत्नी बिजी होती है, तो सब नार्मल होता है। पर जब फ्री होती है, तो जरुर टोकती है-मोबाइल पर किससे इतनी पोलाइटली बात कर रहे थे, हम से तो नहीं करते इतनी अच्छी तरह से बात।
तो साहब, दिन भर खाली हुए,तो वैवाहिक जीवन खतरे में पड़ जायेगा।
ना मुझे नहीं बनना राष्ट्रपति।
आलोक पुराणिक मोबाइल-0-9810018799



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