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बिल गेट्स की एफआईआर

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दिल्ली के नेहरु प्लेस में हर भारतीय को एक बार जाना चाहिए। राष्ट्रीय गौरव की धाराएं एकदम फुल स्पीड से हृदय में हिलोरें सी लेती हैं(देखा, हृदय में हिलोरें में क्या अनुप्रास अलंकार साधा है)।
ओ जी अलंकार की बातें पुराने जमाने की बातें हैं, हम नये जमाने की बातें कर रहे हैं। मार्डनाइजेशन को समर्पित स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरुजी की आत्मा एकदम प्रसन्न हो जायेगी यह देखकर कि उनके नाम पर बने हुए इस प्लेस में एकदम मार्डनाइज्ड स्टाइल की चोरी चल रही है। बिल गेट्स जिस साफ्टवेयर को लाखों का बता कर बेचने की उम्मीद करते हैं, उसे हमारे कुछ भारतीय भाई डेढ़ सौ रुपये में बेच लेते हैं।
कास्ट इफेक्टिवनेस और क्या होती है जी।
बात दरअसल यह थी कि कई हजार रुपये लगाकर एक साफ्टवेयर की ओरिजनल कापी खरीदी थी।  बिल गेट्स-ये मेरे हाथ में सीडी है, इसका माल चोरी हो गया है।

पुलिस-अब्बै तू पुलिस ने बेवकूफ समझै के, तेरा माल तेरे हाथ में है, ओर तू कै रा कि चोरी हो ली।
बिल गेट्स-नहीं मतलब इसमें से किसी ने माल चुरा लिया।
पुलिस-अबे यो क्या कोई लाक्कर है कि पर्स है, जो माल पार कर लिया। तू साफ-साफ क्यों नहीं बोल रहा। अच्छा बता मौका-ए-वारदात क्या है। कित्ते बंदे आये माल चुराने। कोई सुबूत-ऊबूत छोड्डा कि नहीं।
बिल गेट्स-देखिये, इस तरह से सबूत नहीं होता। वो यह साफ्टवेयर सौ रुपये में बेच रहे हैं ।
पुलिस-अबे तो इसमें रोणै की कोण सी बात है, तू पिचहत्तर में बेचने लग, बौत ग्राहक आयेंगे।
बिल गेट्स-पर आप समझिये कि उन्होने मेरी सीडी चोरी कर ली है।
पुलिस-ल्लै, फिर वो ही, जब तेरी सीडी तेरे ही पास है, तो फिर चोरी कैसे हो ल्ली। समझा ना।
बताइए, बिल गेट्स कैसे समझाये।


आलोक पुराणिक-मोबाइल-09810018799

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