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कुछ आलसी आइडिये

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वैसे यह कहने की जरुरत नहीं है कि मैं आलसी हूं। सुधी पाठक खुद ही समझ लेंगे कि अगर कुछ और कर ही सकता यह आलसी, तो सिर्फ लिखता ही थोड़े ही बैठता।

इधर नयी तकनीक भी आलसियों के फुल सपोर्ट में हो गयी है।

रोज तमाम धरने-प्रदर्शन होते रहते हैं, और लोग उम्मीद करते हैं कि मेरा जैसा लेखक भी उनमें पहुंचेगा। पहुंचना चाहिए कि कुछ जिम्मेदारी बनती है, लेखक की समाज के प्रति। इधर मैंने कुछ नयी तरकीबें निकाली हैं, जिनमें मेरे जैसे समझदार लोग एक साथ आलस और जिम्मेदारी निभा सकते हैं। निम्नलिखित प्रस्तावों पर गौर करें-

एसएमएस सत्याग्रह
राष्ट्र व्यापी सत्याग्रह चलाना अब आसान है।

अब जैसे किसी को सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाना है कि वह ऐसा कर रही है
, या वैसा कर रही है, या जैसा भी कर रही है। तो यूं हो सकता है कि एक बंदा अहमदाबाद से प्रधानमंत्री को विरोध का एसएमएस भेजे, एक बंदा कलकत्ता से भेजे, एक बंदा चेन्नई से भेजे, एक बंदा मुंबई से भेजे, एक बंदा दिल्ली से भेजे।

बाद में इन सारी गतिविधियों को राष्ट्रीय सत्याग्रह का नाम दिया जा सकता है।

तमाम मोबाइल कंपनियां इस संबंध में अपनी सेवाएं प्रदान कर सकती हैं।

बल्कि यूं भी हो सकता है कि एक मोबाइल कंपनी अपने इश्तिहार में यूं कहे
-सबसे सस्ता सत्याग्रह हमारा है।

दूसरी मोबाइल कंपनी अपने इश्तिहार में कह सकती है कि छह महीने तक सत्याग्रह फ्री। एक ही नेटवर्क में सत्याग्रह करने के लिए तो हमेशा ही फ्री।

तेरा सत्याग्रह मेरे सत्याग्रह से सस्ता कैसे
, टाइप नारे दिखने लगेंगे तमाम इश्तिहारों में।

वाह क्या सीन होगा। सत्याग्रह का मामला दोबारा जमने लगेगा।

आनलाइन गिरफ्तारी
बताइए इतनी गरमी है। सच्ची की गिरफ्तारी कैसे दी जाये। एक सिलसिला यूं हो सकता है कि सारे गिरफ्तारी
-प्रदायक तय कर लें कि गिरफ्तारी दिन में 12 बजे दी जायेगी। सारे गिरफ्तारी-प्रदायक बारह बजे दिल्ली पुलिस या मुंबई पुलिस की वैबसाइट पर जाकर मैसेज देंगे, गिरफ्तारी दी। पुलिस अफसर मैसेज के बदले जवाब देंगे, गिरफ्तारी ली।

गिरफ्तारी की रसीद ले ली। बाद में विज्ञप्ति जारी कर दी अखबारों में कि इतनी गिरफ्तारी दे दी जी।

ना किसी को टेंशन
, सब काम राजी-खुशी हो जायेगा।

नेता लोग तब यह कहेंगे जी आज तो मैंने इराक में अमेरिका के कब्जे के खिलाफ न्यूयार्क में गिरफ्तारी दे दी, यहीं से। इसलिए मुझे वोट मिलने चाहिए।दूसरा नेता कहेगा कि महंगाई के खिलाफ मैंने दिन में बीस बार गिरफ्तारी दी। एक बार आईटीओ थाने पर

, एक बार कनाट प्लेस थाने पर, एक बार ........

हर नेता अपने बायोडेटा में कम से कम से एक लाख गिरफ्तारियों का जिक्र करेगा।

पुलिस में बेरोजगारी फैल जायेगी
, एक हवलदार ही पांच लाख गिरफ्तारियों को कंप्यूटर पर क्लिक करके ले लेगा।

बल्कि इंटरनेट सेवा देने वाली कंपनियां खुद ही आफर करने लगेंगी कि पचास लाख की आनलाइन गिरफ्तारी का पैकेज सिर्फ एक हजार में। सरकार के विरोध में गिरफ्तारी में पचास लाख लोग आयेंगे। सरकार के पक्ष में गिरफ्तारी में भी वही पचास लाख लोग आयेंगे।

एक नया रोजगार मिलेगा इंडिया के लोगों को। एक नयी तरह की सेवा की आउटसोर्सिंग शुरु हो जायेगी। अब मान लो आस्ट्रेलिया में विपक्ष को सरकार के खिलाफ धऱना देना है। चार करोड़ लोग इंडिया से आनलाइन गिरफ्तारी दे देंगे, आस्ट्रेलिया की सरकार के खिलाफ। सरकार के नेता बेहोश हो जायेंगे, इतनी आनलाइन गिरफ्तारी देखकर, वहां की जनसंख्या कुल दो करोड़, आनलाइन गिरफ्तारी चार करोड़ की। पूरे विश्व की सरकारें हिल उठेंगी जी।

मोबाइल धरना
यह भी विकट धऱना होगा। फिजिकल धरने में तो बंदे को अपनी जगह से हिलने
-डुलने नहीं दिया जाता है। मोबाइल धरने में होगा यूं कि एक तय टाइम पर बारी बारी से कई लोग किसी अफसर, या नेता को एसएमएस पर एसएमएस करेंगे। इतने एसएमएस आयेंगे उस नेता और अफसर के मोबाइल पर कि वह कुछ और कर ही नहीं पायेगा। सिर्फ एसएमएस देखने भर का हो जायेगा। कोई काल नहीं कर पायेगा, कोई काल रिसीव नहीं कर पायेगा।

मोबाइल की घेराबंदी इस तरह से एसएमएस धऱने से कर दी जायेगी। मांग पूरी होने तक यह घेराबंदी की जा सकती है। अनवरत एसएमएसबाजी से कई मसले निपटाये जा सकते हैं।

है ना धांसू आइडिये
, समझे ना, आवश्यकता नये आविष्कारों की जननी भले हो न हो, पर आलस्य कई आविष्कारों का पापा जरुर होता है।

आलोक पुराणिक एफ-1 बी-39 रामप्रस्थ गाजियाबाद -201011 मोबाइल-09810018799

Comments (2 posted):

हरिमोहन on 13 July, 2007 07:54:36
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मोबाइल धरना बाप रे बाप आलस्‍य है या नेटगॉंधी का नया अवतार
धनराज वाधवानी, इन्दौर on 18 September, 2007 12:58:07
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अज्ञानता की परकाष्ठा ... अनचाहा एस.एम.एस. पाकर लोग क्यों परेशान होते हैं। काश इन्हें पढ़कर लोगों को आसानी से डीलेट करना आ जाए। अधिकांश उन लोगों की परेशानी ही परेशानी है जिन्हें मिटाना नहीं आता। बताइये कोई आपके यहां आ धमके उससे पीछा छुड़ाना कठिन है या एस एम एस डीलेट करना? कोई बिना नाम लिखा पोस्ट कार्ड अधिक परेशान करता है या एस.एम.एस. ? वस्तुत: मोबाईल फ़ोन को जो लोग हॊव्वा समझते हैं उन्हीं के लिये परेशानी है। असल में उन्हें पता ही नहीं कि परेशानी सीमा पर दुश्मन की गोलियों से अधिक होती है या एस.एम.एस. या फ़ोन काल से। - धनराज वाधवानी,

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