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हल्लो जी लिसन

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हम बदरीनाथ पहुचे ही थे.
मै परिवार को होटल मे छोड कर वापिस गाडी से कुछ सामान लेने आया, हमारी गाडी से जरा सी दूर एक और गाडी खडी थी.  एक सज्जन मेरे ही पास खडे थे. अचानक सामने वाली गाडी का शीशा खुला,एक आवाज आई "लिसन".  मैने इधर उधर देखा फ़िर अपने काम मे लग गया.
लेकिन फ़िर आवाज आई "हैलो जी, लिसन".
मैने फ़िर मुड कर देखा.
सामने गाडी के खुले शीशे से एक भारतीय सी लगने वाली गौरवर्णीय महिला शुद्ध उच्च वर्गीय अंदाज मे मेरे पास खडे अपने 100% स्वामित्व वाले सेवक को पुकार रही थी.
फ़िर पुकारा "लिसन".
अब आवाज कठोर हो चुकी थी.
"ए,ए लिसन ,अरे लिसन इधर सुनो".
अब मै समझ गया.
मैने तुरंत सज्जन को कहा "लिसन जी" आपको बुलाया जा रहा है.
उन्होने जरा सा मेरी तरफ़ झुक कर हाथ मे पकडी श्वेत धुम्र दंडीका आखो मे बडी कॄतज्ञता दिखाते हुये मेरे हाथ मे थमा कर तेजी से फ़िर मिलता हू कहते हुये गाडी की तरफ़ लपक लिये बात आई गई हो गई .
मै समझ गया की अपनी चोरी मेरे गले मढ गये कोई बात नही हम फ़ेक देते है.
पर थोडी देर बाद जब मै भगवान बदरीनाथ के सेवको के पास अगले दिन सुबह के दर्शन के लिये अग्रिम आरक्षण के लिये प्रार्थना प्रपत्र का अध्ययन कर रहा था (भाई अलग अलग वक्त के लिये अलग अलग मूल्य होता है ना).  तभी अचानक लिसन जी आ गये आते ही बोले"ब्रदर थैंक्स आज आपने मेरी उस टाईम जो हेल्प की उसके लिये.
प्लीज अगेन वन स्माल हेल्प और कर दीजिये.
"बताईये लिसन जी",  मैने कहा.
"अरे भाई ये लिसन जी कौन है पहले ये बताईये", लिसन जी बोले.
"अरे क्या ये आपका नाम नही है", मैने पूछा.
"भाई मैने आपको अपना नाम बताय कब है", लिसन जी ने कहा.
चलिये मेरे से गलती हूई होगी सुनने मे, अब मिल लेते है.
मेरा नाम अरुण है आप.
जी मै "लेखराम गुप्ता" .
लेकिन लेखराम जी अभी तो थोडी देर पहले तो आपकी श्रीमती जी अगर मै गलत हू तो माफ़ कीजियेगा आपको "लिसन इधर सुनो" कह रही थी, उसी से तो मै ये आपका नाम जान पाया था भाई लोग विदेश जाकर नाम भी तो विलायती रख लेते है ना.
वोह तो मेरी मिसेज मूझे पुकार रही थी,  लिसन यानी सुनो.
उन्होने बडी वितृष्णा से मुझे घूरते हुये कहा.
शायद मै उन्हे धूर्त आदमी लग रहा था, पर मेरे चेहरे की मासूमियत देख कर अचानक उनके चेहरे के भाव बदले.
पढे लिखे हॊ...?
नही लिखा पढा हू.
वो क्या होता है.
जी मै लिखे हुये को पढ लेता हूं.
ओके.
उन्होने फ़िर मुझे घूर कर देखा और मुझे सुधरने का मौका देने का निश्चय किया बोले, "देखिये अब ग्लोबलाईजेशन का जमाना है अगर आप हिन्दी का उत्थान चाहते है तो आप को भी अग्रेजी के शब्द स्वीकार करने होगे" लेखराम जी ने कहा.
"जी हा लेकिन जो शब्द हिन्दी मे है उनके लिये अग्रेजी शब्दो की क्या जरुरत है"
"देखिये आप बडी कठिन हिन्दी बोलते है उसमे अग्रेजी शब्दो को भी यूज कीजिये जिससे आपकी हिन्दी सब की समझ मे आ सके"
अब तक तो मेरी हिन्दी ठीक ठाक थी,मै कोई संसकृतनिष्ठ क्लिष्ठ शब्दो का उच्चारण भी नही करता हू न ही मै कोई लुंठित कुंठित उचंड उद्दंड वितृष्णा जैसे शब्दो का प्रयोग करता हूं. लगा की गर यह भलामानस कह रहा है तो अवश्य ही मै समायानूकूल  शब्दो का प्रयोग नही कर रहा हू,शायद लोग मेरी भाषा को सुन कर समझ नही पाते होगे पर कहते नही है अब अगर कॊई कह रहा है तो मुझे अवश्य सुधार जाना चाहिये.
"ठीक है अगर आप बतायेगे तो मै अवश्य अपनी भाषा सुधार लूगा"
मैं तो कृतार्थ हो गया कि आपके इस अकिंचन को एक एन आर आई ने इस भारत भर से छाट कर सुधारने के लायक तो समझा.
देखिये आप जरा जो दर्शन का फ़ार्म भर रहे है मेरा भी फ़िल कर दे हम दो पर्सन है देन वी विल टाक विद ए कप आफ़ काफ़ी, ब्रदर आपने शाम को मेरा हेल्प किया था आई थिंक यू विल बी डिजर्व फ़ोर इट.
ठीक है जी.
मैने उनका और अपना भगवान दर्शन का अग्रिम आरक्षण प्रपत्र भरा पैसे जमा किये; और हम दोनो मंदिर से निकल कर एक रेस्त्रा मे काफ़ी पीने के लिये पहुच गये.
काफ़ी काफ़ी गरम थी, मैने घूट भरते हुये लेखराम जी से कहा, "ज्ञान दीजीये मित्रवर".
"देखिये आप को डेली नीड के वर्ड तो यूटेलाईज्ड करने ही चाहिये".
"जैसे", मैने पूछा.
लिसन, टेल, थिंक,इवनिंग,मार्निग,जैसे छोटे छोटे वर्ड्स से तो शुरु कर ही सकते है.
"जी जी मै समझ गया, आप टेले मै लिसन रहा हू"
"अरे ये आपने अभी क्या कहा,मै समझा नही",  लेखराम जी ने पूछा
अरे अभी आपने कहा था ना"टेले" मतलब बोले,"लिसन रहा हू" मतलब सुन रहा हू मैने शब्दो को हिन्दी के अन्दाज मे अपनाना शुरु कर दिया है".
"सी, थिंक अबाउट इट"
"जी आप चिन्ता न करे अब मैने इस और "थिंकना" शुरू कर दिया है अब जब हम दुबारा "मीटेगे" तो आप मेरे अन्डर काफ़ी सारे चेन्ज पायेगे".
"नही आप मेरी बेसिक बात नही समझ पा रहे है".
"नही नही जी मै समझ गया हू देखिये काफ़ी सारे अग्रेजी के शब्द हिन्दी के जैसे ही है बस जरा यूज करने की बात है"
जैसे घोषणा करना "डिक्लेरना" बात करना "स्पोकना" सुनना "लिसना"बोले "टेले" मा को "ममी" पिता को "पाप".
अब तक लिसन जी का सब्र का बांध टूट चुका था पीछा छूडाने की गरज से बोले चलिये आप से मीटिंग बहुत अच्छी रही अब देर हो रही मै जरा डिनर लेकर सोता हू गुड नाईट.
जी बिलकुल हमे भी आपसे "मीटना","टेलना लिसना वैरी गुड" लगा अब आप "फ़ूड ईटे" और "स्लीपे","प्लीज केयर टेके", टुमारो मोर्निंग मे सेंकेंड टाईम मीट्ते है.
"शुभ रात्री".

Comments (1 posted):

सतीश ओबेराय on 05 June, 2007 02:44:34
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ब्रदर, आपने बड़ा मज़ेदार लेख व्राइटा है. इसको मैंने जब रीडा तो बड़ी लाफ आ गइ. आपको थैंक देता हूं.

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