Home | व्यंग्य | भोजन शिष्टाचार सीखना पंकज भाई से
Newsletter
Email:

भोजन शिष्टाचार सीखना पंकज भाई से

Font size: Decrease font Enlarge font

भारतीय समाज मे भॊजन एक नितान्त व्यक्तिगत वस्तु रही है मुझे अच्छी तरह याद है. बचपन मे नहा कर शुद्ध होकर चौके (जी हा यही वो शब्द है जॊ भारतीय रसोई घर के लिये प्रयुक्त होता है) मे जाने पर पटरी या आसन पर बैठ कर चौकी पर रखी पीतल की थाली मे कांसे की कटोरियो मे सब्जी और दाल,चावल घी बूरा या शक्कर, साथ मे मा/दादी के हाथ का डाला अचार एक एक कर घर के बने नैनी घी मे डूब कर आती फ़ूली हुई गोल गोल रोटिंया! अहा हा क्या स्वाद होता था. पेट भरता था मन नही. साथ मे वो प्यार वो मनुहार, "अभी खाया ही क्या है हम तुम्हारी उम्रो मे थे तुमसे दुगना खाते थे".

श्री पंकज बैगाणीं ने भोजन शिष्टाचार के दो दर्जन तरीके बताये थे. अरुण अरोरा ने इन तरीकों को आजमाने की कोशिश की.  नतीजा यहां पेश है.  क्या आप अरुण भाई की इन तरीकों को कार्यान्वित करने में कुछ सहायता करेंगे?
पंकज भाइ यहा जूते लाना ही निषिद्ध होता था. भोजन बाहर लाकर खाना बहुत बडी बात थी अशुद्ध जो हो जाता था. प्याज जैसी तामसिक वस्तु राम राम धर्म भ्रष्ट करने वाली नाम लेकर भी नहाने वाली वस्तु,ऐसे परिवार मे बडा हुआ मै. तो भाई अब कुछेक साल पहले हम भी जोश मे आकर खाने वाली मेज कुरसी आप जैसे ही एक मित्र की सलाह पर उनके साथ जाकर ले तो लाये थे पर उदघाटन अभी तक टला हुआ है. खाना वही पूर्ण भारतीय ढंग से जारी है.

अब सोने पे सुहागे जैसा आपका लेख पढा, फ़ौरन तय कर लिया की अब इस कार्य को भी यथासंभव शुरु कर लिया जाये.

प्रिंट निकालावाया वो भी रंगीन २५ रुपये पेज वाला (अब अगर दुबारा देखने की जरुरत पड जये तो कौन बार बार संजाल के जाल पर जाये). दोनो पेज एक फ़ोलडर खरीद कर उसमे सावधानी से रखे,भाई हमने तो दिल से खाने की मेज पर (कुर्सी पर) बैठ कर खाना खाने के सपने को पूरा करने की कोशिश की. पूरे चार पाच दिन लगा कर पन्द्रह से बीस बार आपके लेख को भी पढा, पर कुछ दिक्कते आई जो क्रम वार निम्न है. साथ मे कुछ ऐसे सवाल भी जो हमारे मस्तिष्क मे गूजे जिनका उल्लेख लेख मे होना चाहिये था पर था नही.

हमे उम्मीद है की इस लेख को पढ कर आप अपने लेख मे ये सारी कमिया दूर कर देगे, ताकी हम और हमारे जैसे कई अन्य भाई भी अब तक परेशानी महसूस कर रहे थे इसे पढ कर अपने जीवन स्तर कॊ उपर उठाने की कामना रखता हो लाभान्वित हो.

१. तरीका:-बैठते समय कुर्सी को खींच कर नहीं बल्कि बिना आवाज किये हल्के से उठाकर सरकाएं.कुहनियों को मेज के किनारों पर रख कर न बैठे.
प्रयोग:
.उठाई नही उठी और जॊर लगाया और ये लो गिर पडे बच गये हाथ पैर तुडवाने से होते होते रह गया सुधरने का शौक पूरा, फ़िर से लेख का प्रिन्ट जेब से निकाला पता चला पंकज भाई ने भारी कुरसियो के बारे मे कुछ नही लिखा
ब.भाई ये इन कुर्सियो मे ह्त्थे नही है अब क्या करे कहा रखे हाथ.?

२.तरीका:-टाँगो को फैला कर न बैठे.
प्रयोग:
बैठने पर पता चला कुर्सी की उचाई कम है टांगे घुटने से नीचे ज्यादा लम्बी है अब फ़ैलाना तो है नही तो कैसे बैठे.
अ. कुर्सी पर उकडू बैठ सकते है? टांगे बिलकुल नही फ़ैलती पर बाकी लॊगॊ कॊ बुरा लगता है. गांव देहात के सुबह सुबह मैदान जाने का तरीका तो यहा ठीक नही है ना?
ब. टांगे बापस कुर्सी के नीचे अन्दर की तरफ़ रख सकते है. (पैरो मे दर्द बहुत होता है)
स. पैर फ़ैलाने का मौका कहा है पालथी मार कर बैठते है, पर पता चला ये असभ्यता की निशानी है. (अरे यानी हमारे तो बडे बुजुर्ग अभी भी इस तरीके से ही बैठते है और वो टी वी मे रोज आते है बाबा रामदेव वो भी,पंकज भाइ सोच कर बताना ये पंगा लेने वाली बात है)

३.तरीका:-क्रोकरी के साथ छेड़छाड़ न करें
प्रयोग:
करने की कोशिश की फ़िर समझ मे आया. अरे जिसके साथ करनी चाहिये थी वहा तो की नही. जब करनी चाहिये थी तब की नही. और अब छेड्छाड करोगे वो भी प्लेट कटोरी के साथ? अब इतने बुरे दिन आ गये, पंकज भाई को ही मुबारक हो.

४.तरीका:-नैपकिन को आधा खोल कर गोद में बिछाएं.
प्रयोग: ये समझ मे नही आया अगर आधा हम ने प्रयोग किया तो बाकी आधे का क्या होगा और फ़िर जब आधा ही प्रयोग होता है तो ये पुरा क्यू बनाते है क्या ये नुक्सान नही है..?

५.तरीका:-जब सब लोग भोजन परोस लें तब ही खाना शुरू करें.
प्रयोग:-
पंकज भाई मान लो एक आदमी ५ मिनिट मे खाना परोसता है. और मान लो वहा 8 आदमी बैठे है तो जब पहला आदमी खाना परोस चुका है तो उसके 40 मिनिट बाद आठवा आदमी खाना परोसेगा तो :-
अ. इतनी देर मे बाकी कम से कम चार आदमियो का खाना ठन्डा हो चुका होगा. क्या ये उन के साथ उनके खानाधिकार का उलंघन नही होगा..?
ब. अगर आदमियो को खाना खाने मे २० मिनिट लगते है तो आप हिसाब लगाओ खाना परोसने के चक्कर मे लगे ३२० मिनिट. यानी ५घंटे २० के काम के घंटो का नुकसान हुआ. अब आप हिसाब लगाओ कि अगर केवल आठ आदमी से इतना नुकसान हो रहा है. अगर आपके हिसाब से देश खाना खाने बैठे तो कितना वक्त खाना खाने मे चला जायेगा. हम दुनिया मे खाना खाने वाले देश बन कर रह जायेगे. हम कितना पीछे चले जायेगे इसका हिसाब अभी तक सही सही लग नही पाया है. जैसे ही ये डाटा हमे हमारे गणना विभाग से प्राप्त होगे हम आपको सूचित करेगे. अभी अगले चरण पर चलते है

६.तरीका:-आवश्यकता से ज्यादा खाना प्लेट में न लें.
प्रयोग:-
ये बात समझ मे आती है पर ये आवश्यकता कौन तय करेगा इस पर भी कई सवाल खडे हो रहे है.

  • १.जॊ लिया वो पसंद नही आया तो...?
  • २.जो कम लिया बाद वो अच्छा लगा तो दुबारा इतना वक्त कहा से आयेगा
  • ३. बाद मे समाप्त हो गया तो..?

ये सारे प्रश्न अनुत्तरित है.?

७.तरीका:-व्यंजन दाएं से बाएं पास करते हुए परोसे.
प्रयोग:-
ये दाये बाये का क्या चक्कर है? बाये से दाये करने पर क्या स्वाद मे कोई अन्तर आ जाता है?

  • अगर बाये बैठा बन्दा भारी है और हम दाये के चक्कर मे लगे रहे. बाये वाला गांधीवाद से कोई रिश्ता न रखता हो और खुन्दक खा जाये तो...? हो गया हमारा तो भजन करने का वक्त!
  • अच्छा अगर डोगे को उपर नीचे से पास करे तो इससे भोजन के उपर क्या क्रिया प्रतिक्रिया होगी..? कृपया जिज्ञासु की जिज्ञासा दूर करे..?

८.तरीका:-दूर रखी सामग्री को उठ कर या हाथ लम्बा कर लेने की जगह साथ बैठे व्यक्ति से माँग लें.
प्रयोग:-
ये पडोसी से मांगना क्या ठीक है? खाने मे हम किसी का एहसान नही लेते. पर चलो आप कहते हो तो मांग लिया
लेकिन ये हाथ लम्बा कैसे होता है वो कुछ दिन पहले हम कविता नापने वाला सेंटी मीटर टेप(इंची वाला मिला नही था ना)उससे कई बार नाप कर देखा. अपनी पडोसन तक से सहायता ली पर कही लम्बा नही हुआ ये जरा विस्तार से दुबारा समझाये.

९.तरीका:-अगर आप मेजबान हैं तो अपना भोजन सबसे बाद में परोसें.
प्रयोग:-
ये कोई ढंग की बात है आपका मतलब पहले दूसरो को दावत दे. फ़िर जो सबसे बाद मे बच जाये वो हम खाये और ना बचे तॊ भाई..... अब ऐसे आईडिये भी मत दो

१०.तरीका:-प्लेटे मेहमान की बायीं ओर से रखें तथा उठाते समय दायीं ओर से उठाएं.
प्रयोग:-
जो बात सबसे पहले बतानी थी वो आप बीच मे बता रहे हो. हम बेकार मे ही कुर्सी से गिरे! चलो अब मेहमान बुला लेगे पर उसे किधर बैठाये? और जब प्लेट उसके बाई और रखे तो उठाते समय दाई और से कैसे उठायेगे ? भाई रखी बाई और थी ना ....?

११.तरीका:- पानी का गिलास दायीं ओर से भरें.
प्रयोग:-
ये किसके दाई और से भरना है मेहमान के या अपने? कृपया साफ़ करे और अगर हमारी पानी की टूटी बाई और हो तो क्या करे...?

१२.तरीका:-भोजन करने के दौरान मुँह से आवाज न करें.
प्रयोग:-
भाई ये बात तो सिरे से गलत है. बिना मजा लिये खाना भी कोई खाना है ? खाना खाने की आवाजो से तो पाचन क्रिया ज्यादा अच्छी तरह से काम करती है. ये तो आपने ऐसी बात करदी जैसे बिना चूसे बर्फ़ गा गोला खाना

१३.तरीका:-सूप वग़ैरा चम्मच की सहायता से पीएं, न की बाउल से.
प्रयोग:-
भाई आप परसपर विरोधी बाते क्यो बता रहे हो. अगर चम्मच से सूप पियेगे तो सू सू की आवाज उत्पन्न होगी जिसको आप अभी अभी मना कर चुके है. और अब बाउल से पीने को कृपया फ़िर से सोच कर राय दे.

१४.तरीका:-पीते समय पीने की आवाज न आए, इसका ध्यान रखें.
प्रयोग:-
भाई ये कैसे संभव है कि आप पानी पिये और आवाज खाने की आये. आप कृपया इसका लाईव डिमास्ट्रेशन दे तो समझ मे आयेगी

१५.तरीका:-मुँह में कुछ चबा रहे हो तब तरल पीने से बचे.
प्रयोग:-
भाई हमारे से क्यो खुन्दक निकाल रहे हो हमे तो हर कौर के साथ तरल पदार्थ चाहिये नही तो धस्का लग जाता है. अगर हम आपकी राय मानेगे तो असपताल मे कई दिन तरल पदार्थ पर ही जीना पडेगा. सन ९० के बाद हमने कसम खाली थी की अब इस बीमारी मे तो दुबारा भर्ती नही होगे. आप का हमारे डाक्टरो से कोई लेना देना तो नही ना...?

१६.तरीका:- जब मुँह में कुछ हो तो बोलने से बचें.
प्रयोग:-
अब ये एक नई चीज ले आये काहे भाई अब हम खैनी खाना छोड दे या बात करना. अब देखो भाई आपको चाहे बुरा लगे या भला ये बात तो हम क्या कॊई अप्रगतिशील आदमी भी नही मानेगा. चाहे प्रमोद भाई से भी पूछ कर देख लो

१७.तरीका:-काँटे,चाकू या चम्मच से कम से कम आवाज हो, इस बात का ध्यान रखें.
प्रयोग:-
भाई ये खाने के बीच मे छुरी चाकू कहा से ले आये? चम्मच की बात तो समझ मे आई लेकिन दातो के बीच मे अगर जायेगी तो ट्न टन की आवाज तो आनी है ही अब हम दात थॊडे ही ना निकलवा देगे और चाकू तो भैया बिलकुल आवाज नही करता सोलिड रामपुरी है कहो तो एक आध आप को भी भेज दे

१८.तरीका:-बातचीत के दौरान काँटे, चाकू या चम्मच अगर हाथ में हो तो उसे रख कर बात करें.
प्रयोग:- पंकज भाई ये तुम बार बार चाकू छुरी खाने के बीच मे काहे ले आते हो अब इतना तो हम भी समझते है कि मेहमान खाना खा रहा तो कौई चाकू थॊडे ही दिखा कर खाना खिलायेगे एक बार मे ऐकई काम करेगे ना या तो चाकू ही दिखायेगे या खाना ही खिलायेगे

१९.तरीका:-अपना एक हाथ साफ रखने की कोशिश करें, ताकि गिलास वग़ैरा उठाते समय उन पर निशान न पड़े
प्रयोग:-
भाई हम खाना खा रहे है की कोई वारदात करने आये . है काहे डरा रहे हो क्या बता रहे हो जरा साफ़ साफ़ बताओ. ये इस तरह से खाना खाना कोई भारतीय संविधान की किसी धारा का उल्लंघन तो नही,जॊ यहा भी बाद मे फ़िंगर प्रिंट लेने पुलिस वाले आने का डर है.

२०.तरीका:- बीच में खाँसी या छींक आने पर मेज से हट जाए तथा इतना समय न हो तो अपने बायें हाथ का प्रयोग करते हुए नैपकिन को मुँह के आगे रखें.
प्रयोग:-
अब ये बाते भी अब आप बताओगे? आप किसी नर्सरी वाले स्कूल मे काहे नही चले जाते हमने भी ये बाते वही सीख ली थी. आप भी वहा बताओगे तो पैसे भी मिलेगे हा सच मे सब अध्यापको को मिलते है, बच्चो की फ़ीस मे से.

२१.तरीका:-भोजन समाप्ति के बाद कांटे व चम्मच को प्लेट में उल्टा कर क्रोस में रखें.
प्रयोग:-
काहे भाई हम काहे ये क्रास फ़्रास बनायेगे? हम कॊई रेड क्रास वालो के यहा फ़्री मे खाना खा रहे है का? हम तो जैसे मर्जी वैसे रखेगे. कही बाहर खायेगे तो जेब मे रखेगे. जैसे आप ....अब यहा नही बतायेगे वो बात

२२.तरीका:-भोजन समाप्ति के बाद नैपकिन को बायीं ओर रख दें, अगर प्लेट साफ हो तो बिना तह किये उसमें रख दें. भोजन के दौरान उठना पड़े तो नैपकिन को टेबल पर न रख कुर्सी पर रखें.
प्रयोग:-
भाई खाना खाने के बाद प्लेट कैसे साफ़ रहेगी? हम कॊई चाट थोडे ही रहे थे. ये नेपकीन अगर दाये रखेगे तो क्या फ़र्क पडेगा ? अब खाना तो खा ही लिये है ना अब कॊई वापस थोडे ही निकाल लेगा.

२३.तरीका:-फिंगर बाउल में उँगलियाँ साफ करने के बाद उसे बायीं ओर रख दें, ताकि उसकी प्लेट खाली हो जाये और उसमें डेजर्ट परोसा जा सके
प्रयोग:-
भाई ये हाथ धोने वाली बाउल को रख कर उसकी खाली प्लेट मे डेजर्ट ज्यादा मीठा हो जाता है क्या? और अगर डेजर्ट के लिये नई प्लेट प्रयोग करे तो? वैसे हाथ धोई हुई प्लेट मे कुछ और खाने का ख्याल ही हमे अच्छा नही लग रहा.

२४.भोजन के बाद लिपस्टिक वग़ैरा एकांत में जाकर ठीक करें न की खाने की मेज पर.
प्रयोग:- अच्छा ये इस तरीके से खाना खाने के बाद लिप्स-स्टिक लगानी जरुरी होती है क्या? यहा हम जिस समाज मे रहते है हमने किसी कॊ भी लगाते नही देखा लेकिन अगर कॊई फ़ायदे वाली चीज है तो शुरु कर सकते है आप १५/२० भिजवा दीजियेगा.

साभार: http://www.pangebaj.blogspot.com/

Comments (1 posted):

sunita on 11 May, 2007 08:01:38
avatar
पंकज भाई आपने तो सारे टेबल मनर्स बढीया बना दिये है कुछ और भी बचा होगा जैसे खाना मुँह पर कुछ खाते-खाते लग जाये तो क्या करें,..कुर्ते से पोंछे या....
सुनीता(शानू)

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image:

  • email Email to a friend
  • print Print version
  • Plain text Plain text
Tags
No tags for this article
Rate this article
2.33