Home | व्यंग्य | कुत्ता टट्टी बल?
Newsletter
Email:

कुत्ता टट्टी बल?

Font size: Decrease font Enlarge font
image

डॉग शिट स्क्वॉड का यही तो अर्थ होगा ना? कुत्ता मल बल भी कह सकते हैं. इससे ज्यादा भला लगने वाला नाम आपको सूझे तो जरूर सुझाएँ. बहरहाल, बात कुत्तों के मल विसर्जन की हो रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की स्तंभकार तवलीन सिंह मुम्बई में मरीन ड्राइव पर सुबह-सुबह अपने पालतू कुत्ते को टहलाने निकलीं. उनका कुत्ता सामाजिक रूप से सभ्य, ट्रेण्ड कुत्ता था जो सुबह बाहर टहलाने निकाले जाने पर ही उपयुक्त, पवित्र स्थान को सूंघ-सांघ कर मल मूत्र विसर्जन करता था.

तवलीन का कुत्ता मरीन ड्राइव के ऐसे ही किसी पवित्र स्थल को और अधिक पवित्र कर रहा होगा, इतने में मुम्बई महानगर निगम का एक कर्मचारी उनके पास पहुँचा और तवलीन से कहा कि या तो वह तत्काल ही उनके कुत्ते द्वारा उत्सर्जित मल मूत्र को साफ करे अन्यथा उन्हें पाँच सौ रुपया जुर्माना भरना पड़ेगा.

तवलीन ने पूछा कि भाई मेरे तुम हो कौन किस हैसियत से बात कर रहे हो और ये कौन सा कानून है?

उस व्यक्ति ने बताया कि वह नए-नए बनाए गए विभाग कुत्ता टट्टी बल से है और उसका काम है - जो लोग अपने पालतू कुत्तों को सुबह सुबह लेकर घूमने निकलते हैं उस पर नजर रखना ताकि उनके कुत्ते सरे आम खुले में मल मूत्र विसर्जित न करें. अगर करें तो उनके मालिक वहीं तत्काल साफ करें अन्यथा वह कानून के तहत पाँच सौ रुपयों का जुर्माना वसूलता है.

तवलीन ने कहा - भाई मेरे, यह तो ठीक है, लेकिन जो आवारा कुत्ते सरे आम घूमते रहते हैं और जो मुम्बई के तमाम कुत्तों का 99.99 प्रतिशत है उनके मल मूत्र विसर्जन का क्या हिसाब है. और कुत्तों का मल-मूत्र तो बायो-डिग्रेडेबल है, अगर लोग अपने साथ इन्हें साफ करने के लिए हाथ में पॉलिथीन लेकर चलें, मल को पॉलिथीन में भरकर यहाँ वहां या चलो, कूड़ेदान में ही फेंक दें तो समस्या तो और गंभीर हो जाएगी. और यदि यह स्थान कांच की तरह साफ होता तो जरूर इसके तत्काल साफ करने में कोई बात दिखती है. यह स्थल तो पहले ही बहुत गंदा है.

कुत्ता टट्टी बल के उस व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आया. उसने मोबाईल पर अपने उच्चाधिकारियों से सम्पर्क किया. वहां से जाहिर है, नियमानुसार काम करने की हिदायत दी गई.

तवलीन के पास अपने कुत्ते की मल मूत्र साफ करने का कोई साधन उस समय नहीं था, और न ही वह इस बेकार के अटपटे कानून के 500 रुपये जुर्माना भरना चाहती थी, लिहाजा उन पर इस के जुर्म में एक प्रकरण दर्ज किया गया जिसका निर्णय आने में शायद दस-बीस साल तो स्वाभाविक रूप से लग ही जाएंगे...

जिस देश में हर संभावित स्थलों पर पान की पीकों के दाग, पॉलिथीन के थैले, कचरा, गोबर दिखाई देता है वहाँ पालतू कुत्तों के मल पर यह कानून और यह स्क्वाड... अच्छा है! शायद आवारा पशुओं को कुछ अक्ल आ जाए, और पान की पीकें उगलने वालों को भी!

साभार : http://raviratlami.blogspot.com/2007/01/blog-post_08.html

Comments (0 posted):

Post your comment comment

Please enter the code you see in the image:

  • email Email to a friend
  • print Print version
  • Plain text Plain text
Tags
No tags for this article
Rate this article
2.80