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विज्ञान कल्पित कथा : सेरेब

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"उस दुर्घटना में तुम्हारे मस्तिष्क को चोट लगी रवि. तुम्हारी समझ और याद्दाश्त तो बच गयी, लेकिन अब तुम अकेले होगे. तुम सेरेब का हिस्सा नहीं रहे." यह वो पहले शब्द थे जिन्हें रवि ने अपने नये नकोर थाट-असिस्ट के डिस्प्ले स्क्रीन पर देखा.

  सिरिल मैथिली गुप्त पत्रिकाओं एवं वेबसाइटों केलिये अंग्रेजी में विज्ञान कल्पित कथा लिखते रहे हैं. प्रस्तुत कथा इनकी अंग्रेजी रचना का हिन्दी अनुवाद है. यह अंग्रेजी रचना यहां उपलब्ध है.
वो एक मेडिक-गृह में उस भयानक दुर्घटना में लगी चोटों का इलाज करवा रहा था जो ज्युपीटर बेल्ट में स्थित लार्गा नामक एस्टाराइड पर एक स्काउटिंग मिशन पर उसे लगी थीं. शक था कि वहां पर एक रेबेल डीटेची छुपा हुआ है -  एक ऐसा व्यक्ति जो जन्म, घटना या इच्छावश सेरेब का हिस्सा नहीं था. वो डिटैची शायद उस एस्टेराइड के कोर मे छुपा था. और क्योंकि एक इन्टरस्पेस कंट्रोलर की हैसियत से रवि का काम इस बात का ख्याल रखना था कि हर डिटैची कानून का पालन करे, इसलिये उसका खोज निकालना रवि कि ही ज़िम्मेदारी थी.

थोड़ी देर बाद एक क्लास-२ सैनिक क्रूज़र अत्यंत तेज़ गति से उस एस्टेराइड की और बढ़ चला, लगभग ४५ मिनट बाद रवि अपने स्क्रीन पर मैग्निफ़िकेटर के ज़रिये उस एस्टेराइड का एक-एक इंच देख सकता था. लेकिन उसे इंजन या मशीन का उस एस्टेराइड पर होने का कोइ चिन्ह अपने स्कैनर पर नहीं दिखा. उस मशीनी युग में जीवन का यही सबसे प्रत्यक्ष चिन्ह था. रवि ने स्कैनर को अपने चरम पर कर दिया, अब यान की लगभग सारी पावर स्कैनर को दी जा रही थी. उसी समय अचानक एक छोटी एस्टेराइड यान के पीछे की तरफ स्थित इंजन के एक्ज़ास्ट से टकरा गयी. यान का पिछ्ला हिस्सा फौरन विस्फोट में उड़ गया, और यान को एक भयंकर झटका लगा. रवि उस झटके से अपने सुरक्षित चेम्बर के बावजूद अपनी सीट से उड़कर यान की दीवार से टकराया और अगले ही पल उसके शरीर की लगभग हर बड़ी हड्डी टूट गई. जब रेसक्यू टीम आई तो उन्हें उसे दीवार लगभग उखाड़कर निकालना पड़ा.

उसकी कोमा के दौरान मेडिक्स ने उसके शरीर का हर ज़रूरी अंग कृत्रिम क्रिया से बनाया और उसके शरीर में समावित किया. उसके शरीर का हर अंग अब अपने कृत्रिम अंग से बदला जा चुका था.

"तुम जी रहे हो यही गनीमत है रवि. पहले हमने सोचा की तुम्हारा मस्तिष्क पूरी तरह जा चुका है, लेकिन उसका काफी हिस्सा सुरक्षित था, और हम तुम्हें फिर से बना पाये." उसके मेडिक ने उसका हाथ थपथपाकर कहा.

जीवित होने पर भी रवि के लिये जीवन अब मृत्यु से कम नहीं था. उन्होंने उसके शरीर के अंग तो बदल दिये लेकिन वो उनसे भी ज़रूरी चीज़ नहीं बदल पाये. वो था सेरेब से उसका लिन्क. सेरेब - विश्व मस्तिष्कों का जाल.

अब वो सिर्फ अपने पलंग पर लेटे हुये बस यही सोच सकता था कि उसने क्या खो दिया.

2262 इसवी में मानव जाति आपसी युद्धों से तंग आ चुकी थी. लेकिन जिस समय सबने समाधान पाने की आशा छोड़ दी, तभी एक गरीब देश की छोटी साइन्स लैब हल निकाल लिया. उन्होंने एक ऐसा तरीका खोजा जिससे सभी मानव मस्तिष्क एक दूसरे से मिल जायें, और सेरेब पैदा हुआ.

सेरेब ने विश्व के हर व्यक्ति का मस्तिष्क आपस में जोड़ दिया, जिससे सभी के विचार हर किसी पहुंच में हो गये. अब सारी मानव जाती एक अत्यंत विशाल मस्तिष्क थी.

इससे युद्ध तो मिटा, लेकिन विश्व का स्वरूप बदल गया. अब सारे मानव एक ही रूप में सोचते थे. ’हम अब मैं बन चुका था.’ हर किसी के दिमाग की हर जानकारी हर किसी को उपलब्ध थी. स्कूल और शिक्षक अब बेकार हो गये थे, साथ ही वकील और जज भी, क्योंकि कोइ भी जानकारी अब रहस्य नहीं थी. उस युग में पुलिस के लिये भी कोइ जगह नहीं थी. अब कोइ ’दूसरा’ आदमी नहीं बचा था जिसके उपर आप कोइ ज़ुल्म कर सकें. आप खुद के अंगो को चोट नहीं पहुंचा सकते. है ना? विश्व में सिर्फ एक ही सुरक्षा बल था - इन्टरस्पेस, और वो सिर्फ डिटैचियों से सरोकार रखता था.

शुरु में कुछ वक्त इसका विरोध भी हुआ, लोगों ने चिल्ला कर कहा कि इस विश्व में किसी की व्यक्तित्व या इंडिविज़्युएलिटि के लिये जगह नहीं बचेगी, लेकिन धीरे-धीरे सब लोग विकास के नाम पर हार मान गये.

और विकास, वो जब शुरु हुआ तो सबने जैसे अपनी सांसे रोक लीं.

सिर्फ तीस सालों में मानव भौतिक शास्त्र के हर रहस्य से परदा उठा चुका था. सौर-मंडल के हर ग्रह पर अब मानव जीवन था. अब मानव सौर मंडल से बाहर निकलने के लिये तैयार था. और ये सब संभव हुआ सेरेब के ज़रिये.

लेकिन अब रवि इस सबका हिस्सा नहीं था. वो अब उसी आदमी की तरह डिटैची बन चुका था जिसको वो ढूंढ़ रहा था. अब वो दूसरों के विचार महसूस नहीं कर सकता था, और दूसरों के लिये वो मानसिक रूप से मृत था. ये सब उसके जीवन में पहली बार घटा था, क्यूंकि उसका जन्म सेरेब के आने के बाद हुआ था. उसे लग रहा था कि वो इस विश्व का आखिरी जीवित बचा मनुष्य है, या, शायद इससे भी बुरा.

उसका थाट-असिस्ट कुछ मदद करता था, क्योंकि जब भी कोइ उसके बारे में सोचता तो वो थाट-असिस्ट में दिख जाता था, और उसके ज़रिये वो अपने विचार दूसरों तक पहुंचा सकता था. लेकिन कोइ भी मशीन उसके नुक्सान की भरपाई नहीं कर सकती थी.

कुछ दिन पहले उसके ऊपर के अफ़सर उसके पास आये थे, और खेद व्यक्त करने के बाद उन्होंने उसे बताया की वो उसे रिटायर कर रहें हैं पूरे सम्मान व रिटायरमेंट पेन्शन के साथ. उस खबर का इससे बुरा कोइ समय नहीं हो सकता था. रवि की सबसे प्रबल इच्छा उस डिटैची को सबक सिखाने की थी जिसने उसका ये हाल किया.
Q
भाड़ में जायें सब! उसे कोइ परवाह नहीं थी की वो कानून तोड़ रहा है या नहीं, उस डिटैची को उसे सबक सिखाना ही था.

जैसे-जैसे दिन रात में बदलने लगा, रवि और भी सजग होता गया. अपनी सारी शक्ति वो अपने आने वाले मिशन में लगा देना चाहता था. लगभग आधी रात के समय उसने अपना पहला कदम उठाया. अपने कमरे से धीरे से निकल कर वो सीधा मेडिक-रूम की तरफ बढ़ चला. किस्मत उसके साथ थी, कमरा खाली था.

वहां उसने अपने नाप की एक मेडिक-ड्रेस पहनी और एक थके-मांदे, घर जाते हुए मेडिक की तरह मुख्य द्वार की और बढ़ चला. उसका अभिनय बहुत ही विश्वसनीय रहा होगा, क्योंकि किसी ने उसकी और दोबारा देखने की जहमत नहीं उठायी. बिल्डिंग से बाहर निकल कर उसने इधर-उधर ढूंढ़कर एक एक्सो-कार को खोज निकाला. इनको खोलना बहुत ही आसान था. अपने हाथ को सेंसर पर दबाने की जगह सिर्फ ढक्कन हटा कर कुछ सर्किट हटाने थे. बहुत से डीटैची इस तकनीक का इस्तेमाल करते थे. और अब कुछ ही देर में वो भी उनकी जमात में शामिल होने जा रहा था.

एक्सोकार में बैठ कर वो लार्गा की तरफ चल पड़ा. उसे विश्वास था कि वो डिटैची अब भी वहीं होगा, लेकिन उन्माद की बजाय उसे एक अजीब तरह की शांती महसूस हुइ. उसका ह्र्दय अपनी साधारण गति से धड़क रहा था. अपनी इम्पैक्ट चेयर पर बैठ कर वो इंतज़ार करने लगा. अब सब कुछ समय का खेल था.

वो अपने रेडियो की आवाज़ सुनकर नींद से जागा. कोइ उससे बात करने की कोशिश कर रहा था, और वो पृथ्वी से नहीं था. वो चैनल दूसरा था, और पृथ्वी के संयंत्र इतने पुराने नहीं थे कि ढंग से ट्रांसमिशन भी न कर सकें.

"हैलो, क्या तुम सुन रहे हो?" एक कटी-फटी आवाज़ ने कहा. "मुझे पता है कि तुम वही हो जो पहले भी मेरे पीछे आया था. लेकिन इस बार मेरा विश्वास करो तुम ज़िंदा नहीं बचोगे." वो आवाज़ पुरानी और थकी हुई लग रही थी. जैसे कोइ बहुत ही प्यासा व्यक्ति बोल रहा हो. वो डिटैची ही था.

"चिंता मत करो, मैं इसके बाद तुम्हें परेशान नहीं करूंगा," रवि ने शांति से कहा. "ये हमारी आखिरी मुलाकात होगी."

"देखो बेटे, मैं बार-बार नहीं दुहराऊंगा, तुम यहां से वापस घर चले जाओ. मैं अपना बाकी जीवन एक मेडिक-सेन्टर में बंद होकर नहीं गुज़ारना चाहता. तुम अभी कम-उम्र हो, एक डिटैची की स्थिति नहीं समझ सकते."

"नहीं. अब मैं समझ सकता हूं. उस दुर्घटना ने मेरा लिन्क सेरेब से हटा दिया, और अब मैं भी अपने बाकी जीवन के लिये डीटैची हूं. और ये सब तुम्हारी गलती है." रवि का चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था.

कुछ देर तक रेडियो से कोइ आवाज़ नहीं आइ. "मुझे अफसोस है बेटा, मैंने जब अपने ट्रेक्टर बीम से तुम पर जब वो एस्टेराइड मारी तब मैं तुम्हें मारना चाहता था, अपंग करना नहीं. लेकिन मुझे लगता है तुमने भी मेरी तरह नियम तोड़ना शुरु कर दिया है. मुझे नहीं लगता कि वो एक डीटैची को मेडिक-सेन्टर से बाहर आने की अनुमति देंगे. आखिर हम लोग विश्वास योग्य नहीं. है ना?" वो डिटैची हंस पड़ा.

उसकी हंसी सुनकर रवि का खून खौल उठा. अपनी पूरी ज़िंदगी उसने इन्टरस्पेस में सबसे बेहतरीन स्काउट के रूप में गुज़ारी. कुछ ही सालों में वो सेक्टर कमांडर बन सकता था. लेकिन अब वो कभी कोइ भी काम का कार्य नहीं कर सकेगा.

"तुम जब मुझसे मिलोगे, तो मर चुके होगे." उसने डिटैची से कहा.

"सच्ची? और तुम मुझे कैसे मारोगे? मेरे सेन्सर कह रहें हैं कि तुम एक नागरिक यान उड़ा रहे हो. उसमें कोइ भी शस्त्र नहीं लगा होता. तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते."

"लेकिन, अगर ... तुम... कहीं तुम वो तो नहीं सोच रहे," अचानक डिटैची की ज़बान लड़्खड़ा गइ.

रवि की एक्सोकार एकदम नयी थी. सबसे अच्छी, और सबसे मंहगी. इसका इंजन फ़्युज़न चलित था. "जैसे आप सूर्य पर सवार हों," उसका स्लोगन था.

वो अब दस-जी पर चल रहा था, कोइ भी ट्रेक्टर बीम इतनी तेज़ी से एस्टेराइड नहीं फेंक सकती थी, इस गति से डिटैची की एस्टेराइड से टकराव विध्वंसक होगा. फ़्युज़न चेम्बर का विस्फोट कन्टेनमेन्ट फील्ड भी कन्ट्रोल नहीं कर पायेगी. स्पेस की हर वस्तु १०० मील के घेराव में चूर-चूर हो जायेगी.

"सुनो... कहीं तुम इस यान को मुझ से टकराने की तो नहीं सोच रहे? तुम भी मर जाओगे, ये बेवकूफी है. तुम ऐसा नहीं कर सकते, कोइ भी इतना बेवकूफ नहीं हो सकता. लौट जाओ....!"

रवि को आगे सुनने में कोइ रुचि नहीं थी. सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा उसने मेडिक-सेन्टर में सोचा था. आगे सब कुछ समय का खेल था. उसने रेडियो बंद किया और इंतज़ार करने लगा.

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