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नेट पर गाली खाने से बचने के कुछ आसान तरीके

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नेट-ब्राउज़र्स पर एक चेतावनी चिपकी होनी चाहिये. अच्छा खासा भला आदमी भी सीख-साख कर एक-दो साल बाद नेट-दादा बन जाता है. असली ज़िन्दगी में बात को हंस कर टाल देने वाले भोले-भाले शर्माजी नेट पर उससे भी छोटी बातों पर अग्नि-युद्ध (फ्लेम वॉर) शुरु कर देते हैं और संतोष तभी प्राप्त करते हैं जब पच्चीस-तीस प्रेम-पातियों का आदान-प्रादान कर लेतें हैं. जब पतलू मिंया भी नेट पर बांको की तरह घूम रहें हो, तो यहां अपना दामन बचा कर जीना इतना आसान नहीं है. अगर आप उन एकाध व्यक्तियों में शामिल हैं जो नेट पर अज्ञात व्यक्तियों से गाली नहीं खाना चाहते तो इन तरीकों को गांठ बांध लीजिये.

1. जो गधे हैं, उनका विशेष सम्मान करें.
समझदार आदमी अपनी आलोचना सुनने का हौसला रखता है, उसे आप एक-दो बात कह भी लेंगे तो बुरा नहीं मानेगा. लेकिन किसी गधे को अगर शीशा भी दिखाया तो गले से लटक जायेगा. गधा दिखे तो फौरन सर नवा कर ‘गधेश्री जी नमस्कार’ कर दें, और चुपचाप सटक लें.

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2. अगर कोई बुरा कहे, तो पट से धन्यवाद चिपका दें
तर्कशील होना शायद असली जीवन में समां बांध दे, नेट पर मुसीबत को न्यौता देना हैं. यहां तो कह देना - ‘अरे, इस तरफ तो हमारा ध्यान गया ही नहीं था. अब इस उमर में कहां सुधरेंगे, लेकिन फिर भी जब आपने बता ही दिया है तो कोशिश करेंगे.’ याद रखें, तर्क के बाद वितर्क आता है, और उसके बाद जो कुछ आता है हम नहीं कहेंगे, खुद ही समझ लें.

3. अपनी चमड़ी को मोटी कर लें.
जिन्हें बचपन मे मास्साब ने भरी क्लास में चार-पांच बार मुर्गा बनाया था उन्हें तो खैर हो चुकी है बाकी लोग आदत डाल लें. नेट पर बे‍इज़्ज़ती सरे-आम होती है. वीर गुणीजन आपको ब्लॉग पर गाली लिख मारेंगे , और इससे भी दिल नहीं भरा तो पब्लिक फोरम हैं. अगली बार गूगल पर इगोसर्च (खुद का नाम सर्च) करेंगे तो नाम बदल लेने की इच्छा ज़ोर मारेगी. अगर कोई छोटी बात कहे, तो बड़ी बात तक ले जाने का मौका न दें. थूक गटक कर भूल जाइये.

4. भैंस उसी की, जिसका मॉडरेटर
बड़े-बड़े फोरम देखे. मोडरेटर के चंगू -मंगू कत्ल भी कर दें तो नेट-ह्युमर है, और अगर आपने उल्टी टिप्पणी भी कर दी तो वार्निंग दे दी जायेगी, ट्रॉल कह दिया जायेगा, और दिल नहीं माना तो आपकी आइ-पी बैन कर देंगे.
सार - मॉडरेटर नहीं बन सकते तो चंगू -मंगू बन जायें.

5. अपनी पहचान अपनी जेब में रखें
अगर सत्य वचन बाबा बनने का ज्यादा ही शौक चर्राया हो तो अपने असली पहचान कदापि सार्वजनिक न करें. नेट पर लिखी एक-एक लाइन शाश्वत हो जाती है. आज से दस साल बाद जब आपकी दुनिया बदल चुकी होगी तब भी किसी की ‘वर्माजी #@%&*! हो गये हैं’ वाली टिप्पणी किसी ब्लॉग या फोरम पर बनी रह सकती है. सोचिये आपके नाती-पोते जब आपका नाम सर्च करेंगे तो उन्हें क्या मिलेगा. याद रखिये,
सार -जवानी में टैटू गुदवाने वाले बुढ़ापे में फुल-शर्ट पहन कर घूमते हैं.

6. व्यक्तिगत हमले भाड़े पर करवायें
अगर किसी पर हाथ साफ करने की खुजली ज्यादा ही हो रही हो, तो सुपारी दे दीजिये. मतलब खुद कुछ कहने की बजाय एकाध दोस्त बनाकर उनसे अटरम-शटरम जो चाहे बुलवा दें. खुद भले बने रहें. सच्चे बुद्धिबल धारी एकाध शब्द हमदर्दी के भी चिपका जायेंगे.

अगर इनका पालन करेंगे तो फायदे में रहियेगा, वरना आपकी ज़िम्मेदारी तो हमने पहली ही नहीं ली थी.

Comments (1 posted):

हिमांशु पाण्डेय् on 02 December, 2007 02:49:54
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बेहतरीन प्लस

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