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जय बदरी विशाल के लाल की जय

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रविवार की सुबह ५ बजे चले हुये हम १२ बजे पहुचे कोटद्वार, यह उत्तर रेलवे का आखिरी रेलवे स्टेशन है नजीबाबाद कोट्द्वार रास्ते का ,भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड का मुख्य कारखाना भी यही है, और यही है शुरुआत उत्तरांचल के पहाडो की,


ये प्रसिद्ध हनुमान मंदिर कोट्द्वार का

३५ किलोमीटर का रास्ता धीरे धीरे हरे भरे पेडो से और फ़िर पहाडो मे बदलते देर नही लगी लगातार बढती उचाईयो से पेडो और भी लम्बे होते जा रहे थे,परिवेश लगातार खूबसूरत ,पहाडिया ऊची और ऊची खाईया और गहराती जा रही थी


लीजीये आपसे बतियाते हुये हम आ ही गये लैंसडाऊन
और अब हमारे सामने है गढ्वाल रेजीमेन्ट हेडक्वाटर,वाह क्या खूबसूरत नजारा है

अरे भाइ यहा फ़ोटो लेना और रुकना दोनो मना है कोई बात नही
चलिये मै बताता हू;
"बदरी विशाल की जय"
ये नारा गूजता है ६५० मीटर समुद्र तल से ऊचाई पर बनी इस रेजीमेंट मे शामिल गढवाल रेजीमेंट के हर जवान के दिल मे हर वक्त धडकन बन कर
और अब आप और हम लगाते है ये नारा
"जय बदरी विशाल के लाल की जय"
क्योकी इन्ही लालो ने "युद्धया कृत निश्चय" कहते हुये सन ४७/४८ जम्मू कशमीर,लद्दाख ६२,पंजाब ६५,राजस्थान ६५,पूर्वी पाकिस्तान ७१ मे अपने जोहर दिखा कर
१ अशोक चक्र,
७ परम विशिष्ट सेवा पदक
४ महावीर चक्र
१० कीर्ति चक्र
१ उत्तम युद्ध सेवा पदक
१२ अति विशिष्ट सेवा पदक
१२० सेना पदक
२४ विशिष्ट सेवा पदक
१ जीवन रक्षा पदक
के अलावा अन्य कई और अन्य पदक एंव ध्वज दंड से अपनी रेजीमेंट को सम्मानित कराया है,देश का गौरव बढाया है
मै नमन करते हुये देश के इन रण बाकुरो को, आपको यही की कुछ झलकिया दिखाता हू दूसरी और से जहा से हमे फ़ोटो खीचने की अनुमति मिल गई थी



(ये दोनोफ़ोटो ५८ mm टेले लेंस से लगभग ६०० मीटर दूर से खीची गई है
और मौसम भी साफ़ नही था अत: कुछ धुधली है)
लेकिन फ़िर भी उस भव्य परेड ग्राऊंड और सेना के मार्च पास्ट की फ़ोटो तो बस मेरी आखो मे ही सजी है कभी न भूलने वाला वो अविस्मर्णीय पल बन कर,


लेंसडाऊन छोटी सी जगह है ये है वहा का बाजार


और ये टिफ़ीन टोप सूर्योदय और सूर्यास्त देखने का एक अच्छा स्थान पर माफ़ कीजीयेगा न हम देख पाये न दिखा पायेगे कारण धूल भरा मौसम था


ये है १८९५ मे बना सेंट मेरी चर्च,


और ये छोटी सी झील जहा आप बोटिंग भी कर सकते है


और अब दीजीये विदा हम छोडे जाते है आपको कुछ और झाकियो के साथ,कल सुबह फ़िर मिलने के वादे के साथ बाबा केदार के द्वार से कुछ और झलकियो के साथ

ये फ़ोटो लगभग १०००/१२०० मीटर दूर की है इसलिये थॊडी धुंधली है पर नंगी आखो से यह दिखाई नही दे रही थी








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